पिक्चर अभी बाकी है: शेयर बाजार में अगस्त में और गहरा सकता है संकट, निवेशकों को रहना होगा सतर्क
जुलाई का महीना शेयर बाजार के लिए कुछ खास नहीं रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगभग 3.5 फीसदी की गिरावट देखी गई है। 30 जून को सेंसेक्स जहां 83,606.46 पर बंद हुआ था, वहीं जुलाई के अंतिम कारोबारी दिन यह गिरकर 80,695.15 पर आ गया। यह 13 जून के बाद का सबसे निचला स्तर है। इसी तरह निफ्टी भी 25,517.05 से गिरकर 24,635 अंकों पर पहुंच गया। इन आँकड़ों से यह साफ हो जाता है कि एक महीने में बाजार ने निवेशकों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
इस गिरावट के साथ ही बीएसई का मार्केट कैप भी करीब 14.30 लाख करोड़ रुपए घट गया है, जिससे निवेशकों की पूंजी में बड़ी सेंध लगी है। बाजार विशेषज्ञों की मानें तो हालात अभी सुधरने की उम्मीद नहीं है। अगस्त के महीने में और गिरावट की संभावना जताई जा रही है। इसके पीछे एफआईआई की भारी बिकवाली, कमजोर तिमाही नतीजे, डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट और ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतें जैसे कई कारक जिम्मेदार बताए जा रहे हैं।
एफआईआई यानी विदेशी निवेशकों ने जुलाई के अंतिम आठ कारोबारी दिनों में 25,000 करोड़ रुपए की बिकवाली की है, जिससे बाजार की नींव कमजोर हुई है। इसके अलावा ट्रंप सरकार द्वारा भारतीय उत्पादों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाए जाने की आशंका और कंपनियों के खराब नतीजों ने भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी अब अपने सपोर्ट लेवल से नीचे कारोबार कर रहा है, जो एक बड़ी गिरावट का संकेत है।
मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स और कोटक सिक्योरिटीज के विश्लेषक श्रीकांत चौहान का मानना है कि अगस्त में बाजार का रुख पूरी तरह से नकारात्मक हो सकता है। जेम्स ने कहा है कि अगर बाजार में निर्णायक ब्रेकआउट नहीं हुआ तो 24,450 से 23,600 के बीच बाजार सीमित दायरे में घूम सकता है। वहीं, चौहान का मानना है कि घरेलू लिक्विडिटी के सपोर्ट के बिना बाजार में तेजी की कोई उम्मीद नहीं है।
इस माहौल में जहां एक ओर एफआईआई की बिकवाली निवेशकों को डरा रही है, वहीं दूसरी ओर डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट ने भी विदेशी निवेश को प्रभावित किया है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों जैसे आईटी को इससे लाभ मिल सकता है, लेकिन समग्र रूप से बाजार पर दबाव बना रहेगा। ऐसे में निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और जोखिम भरे निवेश से बचने की सलाह दी जा रही है।
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