May 5, 2026

भारत पर अमेरिका का 25% टैरिफ: रत्न और दवा दोनों सेक्टरों पर मंडराया संकट

अमेरिका द्वारा भारत से आयातित रत्न-जवाहरात और दवाओं पर 25% टैरिफ लगाने के फैसले ने भारतीय उद्योग जगत में हलचल मचा दी है। यह टैरिफ न केवल भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि अमेरिका की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और खुद वहां की फार्मा आपूर्ति पर भी असर डाल सकता है।

रत्न और आभूषण उद्योग की बात करें तो अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को करीब 9.9 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण निर्यात किए थे। अब 25% आयात शुल्क लगने से अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय ज्वेलरी महंगी हो जाएगी, जिससे ऑर्डर में भारी गिरावट आने की आशंका है। इसका सबसे बुरा असर उन लाखों कारीगरों और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा, जो इस सेक्टर में रोज़गार पाते हैं।

दूसरी ओर, भारतीय दवाओं पर भी नया टैरिफ अमेरिका की हेल्थ इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बन सकता है। अमेरिका में 47% जेनेरिक दवाएं भारत से आती हैं। यदि इनपर टैरिफ लागू होता है, तो यह दवाएं अमेरिकी बाजार में महंगी हो जाएंगी, जिससे विशेष रूप से बुज़ुर्गों और निम्न आय वर्ग के लोगों को इलाज में कठिनाई हो सकती है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम केवल दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। ट्रंप प्रशासन पहले भी चीन और अन्य देशों के साथ व्यापारिक सौदेबाज़ी में इसी तरह की नीतियां अपनाता रहा है। भारत को उम्मीद है कि अगस्त में प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाएगा और समाधान निकलेगा।

फिलहाल, भारत को इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक निर्यात बाज़ारों पर ध्यान देना होगा। यूरोप, खाड़ी देश और एशियाई राष्ट्र नए संभावित ग्राहक बन सकते हैं। इसके साथ ही घरेलू मांग को बढ़ावा देकर उद्योग को स्थायित्व देने की भी ज़रूरत होगी, ताकि टैरिफ जैसी वैश्विक बाधाओं का असर सीमित रह सके।

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