यूनियन बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने शेयर बाजार, खासकर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डेरिवेटिव्स सौदों पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान किया है। यह कदम केवल टैक्स बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शेयर बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी पर लगाम कसने की एक गंभीर कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि डेरिवेटिव्स बाजार में वास्तविक निवेश कम और जुए जैसी गतिविधियां ज्यादा हो रही हैं, जिससे आम निवेशकों की गाढ़ी कमाई खतरे में पड़ रही है।
इस फैसले का समर्थन करते हुए बाजार के जाने-माने दिग्गज और GQuant Investech के संस्थापक शंकर शर्मा ने इसे ऐतिहासिक कदम करार दिया है। उन्होंने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग को “कोकीन से भी खतरनाक जहर” बताते हुए कहा कि यह युवाओं को तेजी से बर्बादी की ओर ले जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया में शर्मा ने लिखा कि F&O ट्रेडिंग न तो अर्थव्यवस्था में कोई ठोस वैल्यू जोड़ती है और न ही दीर्घकालिक संपत्ति निर्माण में मदद करती है। इसके उलट, यह आम लोगों से पैसा निकालकर कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स और प्रोफेशनल ट्रेडर्स की जेब में डालने का जरिया बन गई है।
शंकर शर्मा का तर्क है कि भारत में डेरिवेटिव्स बाजार एक तरह का ‘वेल्थ ट्रांसफर सिस्टम’ बन चुका है। इसमें लाखों छोटे निवेशक रातों-रात अमीर बनने के सपने में अपनी जमा-पूंजी गंवा देते हैं, जबकि फायदे में बहुत कम लोग रहते हैं। उन्होंने इसकी तुलना ड्रग और हथियारों के अवैध कारोबार से करते हुए कहा कि भले ही इसे पूरी तरह खत्म करना संभव न हो, लेकिन भारी टैक्स लगाकर इसे हतोत्साहित जरूर किया जा सकता है। इसी नजरिए से उन्होंने सरकार और वित्त मंत्री की खुलकर तारीफ की और कहा कि यह फैसला वक्त की सबसे बड़ी जरूरत था।
सरकार ने यह भी साफ किया है कि STT में बढ़ोतरी का असर केवल फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर ही पड़ेगा। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, डिलीवरी बेस्ड शेयर खरीद-बिक्री करने वाले निवेशकों पर इसका कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। यानी जो लोग लंबी अवधि के लिए शेयर बाजार में निवेश करते हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार का उद्देश्य साफ है—बाजार को सट्टेबाजी का अड्डा बनने से रोकना और स्वस्थ निवेश संस्कृति को बढ़ावा देना।
इस सख्ती के पीछे सेबी की वह रिपोर्ट भी अहम मानी जा रही है, जिसमें खुलासा हुआ था कि इक्विटी F&O सेगमेंट में 10 में से 9 खुदरा निवेशकों को नुकसान होता है। इसके बावजूद मुनाफे के लालच में लोग लगातार इस ‘नशे’ की चपेट में आ रहे हैं। सरकार का मानना है कि STT बढ़ाने से अत्यधिक ट्रेडिंग पर ब्रेक लगेगा और आम निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकेगा। यही वजह है कि बाजार के कई जानकार इसे बजट 2026 का सबसे जरूरी और दूरगामी असर वाला कदम मान रहे हैं।
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