April 20, 2026

मुख्य शीर्षक: भारी गिरावट के बाद क्या संभलेगा शेयर बाजार? निवेशकों की निगाह निफ्टी-सेंसेक्स की चाल पर टिकी

मंगलवार, 20 मई 2025 को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। लगातार तीसरे कारोबारी दिन बाजार लाल निशान में बंद हुआ। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 832 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 81,227.42 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 24,700 के नीचे फिसल गया। इस गिरावट के चलते शेयर बाजार से निवेशकों की कुल पूंजी में करीब 5.35 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आ गई। इसका प्रमुख कारण विदेशी फंड्स की बिकवाली रहा, जिसने बाजार की धारणा को नकारात्मक बना दिया और निफ्टी के 13 सेक्टोरल इंडेक्स भी नुकसान के साथ बंद हुए।

 

विश्लेषकों का मानना है कि बुधवार को भी बाजार में कमजोरी के संकेत मिल सकते हैं और शुरुआती कारोबार में दबाव बना रह सकता है। हालांकि, वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के चलते निवेशकों की रणनीति सतर्क रहने की होगी। यूरोपीय बाजारों की बात करें तो वहां मामूली तेजी देखने को मिली – FTSE 100 में 0.50% और DAX में 0.31% की बढ़त दर्ज की गई। इसके विपरीत, अमेरिकी बाजारों में गिरावट रही, जहां डॉव जोन्स, नैस्डैक और S&P 500 सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। इससे वैश्विक निवेश धारणा पर असर पड़ा है और घरेलू बाजार भी इससे अछूते नहीं रह सकते।

 

सबसे ज्यादा असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ा, जिसने 20 मई को सबसे खराब प्रदर्शन किया। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 1.5% से अधिक की गिरावट आई, जो चार दिनों की तेजी के बाद मुनाफावसूली के कारण आई। ट्यूब इन्वेस्टमेंट ऑफ इंडिया के शेयर 3% से अधिक टूटे, जबकि हीरो मोटोकॉर्प, मारुति सुजुकी, आयशर मोटर्स, भारत फोर्ज और एमएंडएम के शेयरों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशकों ने हाल ही की तेजी में मुनाफा बुक करने का फैसला लिया।

 

हालांकि बाजार में गिरावट के बावजूद कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले। 20 मई को 82 स्टॉक्स ऐसे रहे, जिन्होंने 52 सप्ताह के नए उच्चतम स्तर को छुआ। इनमें श्री सीमेंट, एपीएल अपोलो ट्यूब्स और डालमिया भारत जैसे मजबूत प्रदर्शन वाले शेयर शामिल थे। वहीं, 29 स्टॉक्स ऐसे रहे जो अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए, जैसे एथर इंडस्ट्रीज, जय बालाजी इंडस्ट्रीज और मैट्रिमोनी डॉट कॉम।

 

इस बीच, वैश्विक आर्थिक मोर्चे से एक और झटका मिला जब रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अमेरिकी सरकार की क्रेडिट आउटलुक को नकारात्मक करार दिया। अमेरिका पर करीब 35 ट्रिलियन डॉलर का भारी कर्ज है और सरकार इसे नियंत्रित करने में विफल रही है। मूडीज ने अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग को घटाकर ‘Aa1’ कर दिया है, साथ ही जेपी मॉर्गन, बैंक ऑफ अमेरिका और वेल्स फार्गो जैसे बड़े अमेरिकी बैंकों की रेटिंग में भी कटौती की गई है। इसका असर अमेरिकी बाजार के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है क्योंकि विदेशी निवेशकों की धारणा इससे प्रभावित हो सकती है। अगर विदेशी निवेशक सतर्क होकर एक बार फिर बिकवाली की ओर बढ़ते हैं, तो भारत जैसे उभरते बाजारों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।

 

हालांकि, इन सबके बीच भारतीय बाजार के लिए एक अच्छी खबर यह है कि विदेशी निवेशकों की बाजार में वापसी देखने को मिल रही है। अप्रैल और मई 2025 के दौरान उन्होंने भारतीय इक्विटी बाजारों में लगभग 17,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जो साल की शुरुआत में देखी गई भारी बिकवाली के ठीक विपरीत है। इसका कारण भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं हैं, जिनके चलते विदेशी निवेशक भारत को एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में देख रहे हैं।

 

इस प्रकार, भले ही बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर बना रह सकता है, लेकिन मजबूत आर्थिक आधार, विदेशी निवेशकों की वापसी और कुछ क्षेत्रों में बनी हुई तेजी, बाजार को दीर्घकालिक रूप से मजबूती देने में सहायक हो सकते हैं। निवेशकों को फिलहाल सतर्कता बरतते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण से कदम उठाने की जरूरत है।

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