May 2, 2026

दिल्ली से बड़े खेल की तैयारी? शेख हसीना ने 4 बड़े मुद्दों पर लिया अचानक यूटर्न

अमेरिका, पाकिस्तान और सेंट मार्टिन द्वीप पर रुख बदलने से बढ़ी सियासी हलचल; फरवरी 2026 के चुनावों से पहले नए समीकरणों की चर्चा तेज


बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना इन दिनों एक बड़े राजनीतिक खेल की तैयारी में दिखाई दे रही हैं। हालिया इंटरव्यू में हसीना ने ऐसे चार अहम मुद्दों पर अचानक रुख बदल दिया है, जिन पर वह तख्तापलट के बाद बेहद मुखर थीं। खास बात यह है कि ये चारों मुद्दे सीधे अमेरिका और पाकिस्तान से जुड़े हैं—वे देश जिन्हें हसीना के समर्थक अगस्त 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल के लिए जिम्मेदार मानते रहे हैं। अब हसीना का बदला हुआ रुख ढाका से दिल्ली तक राजनीतिक विश्लेषकों को नए संकेत दे रहा है।

पहला बड़ा यूटर्न अमेरिका की भूमिका को लेकर है। तख्तापलट के तुरंत बाद हसीना ने कहा था कि उनकी सरकार गिराने में अमेरिका की मुख्य भूमिका रही। वहीं उनके पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने बाइडेन, क्लिंटन और जॉर्ज सोरोस का नाम लेकर कहा था कि उन्हीं लोगों ने फंड जुटाया था। लेकिन अब हसीना का दावा है कि “किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता,” और पूरा मामला उन्हें गुमराह करके अंजाम दिया गया। उन्होंने अब आरोपी के तौर पर अपना रुख बदल दिया और कहा कि मोहम्मद यूनुस ही इस पूरी साजिश के मुख्य किरदार थे।

दूसरा यूटर्न यूनुस और अमेरिका को लेकर है। कुछ हफ्ते पहले तक हसीना यूनुस को “अमेरिका का मुखौटा” कह रही थीं। लेकिन Russia Today को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि “पश्चिम के कई देश यूनुस के पीछे खड़े हैं,” और आगे बढ़कर डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ भी कर डाली। हसीना के मुताबिक, “ट्रंप यूनुस को पसंद नहीं करते,” और उनका कहना है कि “अमेरिका से अब उन्हें कोई शिकायत नहीं है।” यह राजनीतिक संदेश कई मायनों में अहम माना जा रहा है।

तीसरा बड़ा बदलाव पाकिस्तान को लेकर उनके रुख में आया है। तख्तापलट के बाद हसीना पाकिस्तान पर लगातार हमलावर थीं, लेकिन अब उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान से राजनयिक संबंध बनाना कोई समस्या नहीं है। और तो और, उन्होंने यह भी कहा कि “पाकिस्तान पर टिप्पणी करने के लिए मेरे पास कुछ नहीं है।” यह रुख बदलना ढाका की राजनीतिक दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है।

चौथा यूटर्न सेंट मार्टिन द्वीप के मुद्दे पर है। हसीना पहले दावा करती थीं कि इस द्वीप पर अमेरिका कब्जा चाहता था और उनकी ना के कारण ही सरकार गिराई गई। लेकिन अब वह कह रही हैं कि इस मुद्दे पर “फिलहाल मैं कुछ नहीं बोलूंगी,” और पूरा मामला “बंद कमरे की बातें” थीं।

इन चारों बदलावों ने बांग्लादेश में नई सियासी चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि फरवरी 2026 में आम चुनाव होने हैं और हसीना के समर्थक पहले ही खुलकर मौजूदा सरकार से बगावत कर रहे हैं। दूसरी ओर, देश में जमात और बीएनपी के अलग-अलग हो जाने से भी नए समीकरण बन रहे हैं। ऐसे में यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या शेख हसीना वास्तव में किसी बड़े राजनीतिक खेल की तैयारी कर रही हैं, या फिर ये बदलाव आने वाले चुनावों की रणनीति का हिस्सा हैं।

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