कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और रोमांस के तड़के के साथ लौटी फ्रेंचाइज़ी; जानें कहानी, एक्टिंग, निर्देशन और क्या फिल्म वीकेंड के लायक है
अजय देवगन, रकुल प्रीत सिंह और तब्बू स्टारर ‘दे दे प्यार दे 2’ आखिरकार छह साल बाद फिर बड़े पर्दे पर लौटी है। इस बार कहानी और भी आगे बढ़ चुकी है और साथ ही कास्ट में आर. माधवन और मीज़ान जाफरी जैसे चेहरे जुड़ने से फिल्म में नया टकराव, नया मज़ा और नया कॉमेडी पंच देखने को मिलता है। ‘शैतान’ में आमने-सामने दिख चुके अजय देवगन और आर. माधवन की भिड़ंत इस फिल्म की सबसे बड़ी USP बनकर उभरती है। अगर आप कॉमेडी और हल्के-फुल्के फैमिली ड्रामा के मूड में हैं, तो थिएटर जाने से पहले ये रिव्यू आपके काम आएगा।
कहानी की शुरुआत पिछली फिल्म के छह साल बाद होती है, जहां आयशा (रकुल प्रीत सिंह) अब आशीष (अजय देवगन) से शादी करने के लिए तैयार है। शादी के इरादे को लेकर वो आशीष को अपने घर चंडीगढ़ लेकर जाती है, जहां उसके पिता राकेश यानी आर. माधवन और मां अंजू (गौतमी कपूर) खुद को मॉडर्न व प्रोग्रेसिव साबित करने में लगे रहते हैं। लेकिन जैसे ही उन्हें उम्र का फर्क पता चलता है—56 वर्षीय आशीष और 26 वर्ष की आयशा—उनके सारे आधुनिकपन की परतें एक-एक करके उतर जाती हैं। इसके बाद शुरू होती है एक पिता बनाम दामाद की टकराहट, जिसमें रोमांस और कॉमेडी का तड़का लगातार बना रहता है।
डायरेक्शन की बागडोर इस बार अंशुला शर्मा के हाथ में है, जो पहले लव रंजन को असिस्ट कर चुकी हैं। फिल्म रिफ्रेशिंग लगती है और यह अच्छी बात है कि कहानी शुरुआत में कहीं भी लव रंजन की ‘पुरुष-प्रधान सोच’ की छाप नहीं छोड़ती। आयशा का किरदार इस बार मजबूत लिखा गया है और उसे अपनी बात खुलकर कहने का पूरा स्पेस दिया गया है। हालांकि, इंटरवल के बाद एक ऐसा ट्विस्ट आता है जो कहानी को थोड़ी बनावटी दिशा में ले जाता है, लेकिन अंत में फिल्म फिर अपनी पटरी पर लौट आती है।
एक्टिंग की बात करें तो आर. माधवन इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरते हैं। मॉडर्न पिता से लेकर ओवर-पजेसिव डैड तक—उन्होंने हर शेड को बेहतरीन ढंग से निभाया है। गौतमी कपूर भी फिल्म में शानदार हैं। रकुल प्रीत सिंह अपनी मासूमियत और भावनाओं के साथ किरदार को पकड़े रखती हैं, वहीं मीज़ान जाफरी का किरदार फिल्म में कॉमिक स्पार्क जोड़ता है। अजय देवगन यहां एक शांत, समझदार और संयमित प्रेमी के रूप में नजर आते हैं, जो अधिकतर समय पीछे हटकर तमाशा देखते हैं, लेकिन आखिर में उनका ‘हीरो मोमेंट’ दर्शकों को संतुष्ट कर देता है।
कुल मिलाकर, ‘दे दे प्यार दे 2’ एक एंटरटेनिंग रोमांटिक- कॉमेडी है, जिसमें दमदार संवाद, बढ़िया टाइमिंग और हल्का-फुल्का फैमिली ड्रामा भरपूर मात्रा में है। सेकेंड हाफ में थोड़ी सुस्ती जरूर है, पर फिल्म आपको बोर नहीं करती। यह उन फिल्मों में से है जिसे दिमाग का बहुत इस्तेमाल किए बिना ही एन्जॉय किया जा सकता है।
वीकेंड के लिए क्या यह फिल्म वर्थ है?
अगर आप हल्की-फुल्की, मजेदार और रिलैक्स करने वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो ‘दे दे प्यार दे 2’ definitely एक अच्छा ऑप्शन है।
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