ईरान-इज़रायल संघर्ष: सीजफायर की आड़ में आ रहा है अगला बड़ा तूफान?
मंगलवार, 24 जून 2025। पूरी दुनिया को लगा कि अब पश्चिम एशिया में शांति लौटने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गर्व से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर घोषणा कर दी कि ईरान और इज़रायल के बीच ‘पूर्ण और अंतिम सीजफायर’ पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम छह घंटे में प्रभावी होगा, जिसमें पहले ईरान को पहल करनी होगी और फिर 12 घंटे बाद इज़रायल भी इससे जुड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि 24 घंटे बाद इसे औपचारिक रूप से युद्ध का अंत माना जाएगा। लेकिन ठीक इसके कुछ ही घंटों बाद हकीकत कुछ और ही बयान कर रही थी।
इज़रायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के मुताबिक, मंगलवार सुबह ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। दो चरणों में कुल छह मिसाइलें इज़रायल की ओर दागी गईं—पहले दो और फिर चार और मिसाइलें, जिनमें से कुछ ने बीरशेबा स्थित एक अपार्टमेंट ब्लॉक को सीधा निशाना बनाया। इन हमलों के बाद इज़रायल के उत्तर, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में सायरन गूंज उठे। आम नागरिकों में दहशत फैल गई और ट्रंप के सीजफायर ऐलान पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का एक और अहम बयान सामने आया, जिसने हालात को और उलझा दिया। अराघची ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि अगर इज़रायल अपनी सैन्य कार्रवाई सुबह 4 बजे तक रोक देता है, तो ईरान भी आगे कोई जवाबी हमला नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से किसी सीजफायर के समझौते की पुष्टि नहीं की। उनका बयान ईरान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर पहली आधिकारिक टिप्पणी थी, जिसमें उन्होंने सशर्त रूप से युद्ध रोकने की बात की।
इसके बाद अराघची ने एक और ट्वीट किया जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि ईरान की ओर से सैन्य कार्रवाई सुबह 4 बजे तक जारी रही। उन्होंने लिखा, “हमारी ताकतवर फौज ने आखिरी लम्हे तक दुश्मन के हर हमले का जवाब दिया। हम अपने वतन की हिफाजत के लिए आखिरी कतरे तक तैयार हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इज़रायल अगर हमले रोकता है, तो ईरान भी और आगे नहीं बढ़ेगा। मगर इस पूरे संदेश में ‘सीजफायर’ शब्द कहीं भी सीधे तौर पर नहीं कहा गया।
इससे पहले रविवार, 22 जून को भारतीय समय के अनुसार सुबह 4:30 बजे अमेरिका ने ईरान की तीन महत्वपूर्ण न्यूक्लियर साइट्स—नतांज, फोर्डो और एस्फाहान—पर जोरदार हवाई हमला किया था। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर वह अब भी संघर्ष नहीं रोकेगा, तो इससे भी बड़े हमलों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप ने सीजफायर की पहल भी इसी दबाव के तहत करने का दावा किया।
ईरान की तरफ से एक और अहम बयान आया—देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का। उन्होंने भी X (पहले ट्विटर) पर कहा, “हमने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। लेकिन अगर हम पर हमला होगा तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हम किसी के आगे नहीं झुकते।” यह बयान साफ करता है कि ईरान अभी भी अपने रुख पर कायम है और कोई समझौता उसकी संप्रभुता की कीमत पर नहीं होगा।
ऐसे में स्थिति बहुत जटिल हो गई है। एक तरफ अमेरिका सीजफायर की घोषणा कर रहा है, दूसरी ओर मिसाइलें उड़ रही हैं। इज़रायल के नागरिक क्षेत्रों पर हमले हो रहे हैं और ईरान ‘अंतिम लम्हे’ तक अपने जवाबी एक्शन की बात कर रहा है। क्या ये सचमुच संघर्ष का अंत है, या फिर केवल अस्थायी ठहराव जिसके बाद एक और बड़े टकराव की शुरुआत होने वाली है?
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि भले ही कूटनीतिक मंचों पर युद्धविराम की बात की जा रही हो, ज़मीनी हालात अब भी विस्फोटक हैं। जब तक दोनों पक्ष औपचारिक और पारदर्शी तरीके से किसी स्थायी समझौते पर नहीं पहुंचते, तब तक ‘शांति’ केवल एक भ्रम जैसी ही लगती है—जिसे कोई भी मिसाइल कभी भी तोड़ सकती है।
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