April 17, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना के खिलाफ तुषार गांधी की अपील खारिज की! 

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के साबरमती आश्रम के पुनर्विकास परियोजना को मंजूरी दे दी है और महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी की इस परियोजना के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह मामला लंबे समय से चर्चा में था, जिसमें तुषार गांधी ने इस पुनर्विकास परियोजना को गांधीवादी सिद्धांतों और आश्रम की मूल सादगी के खिलाफ बताया था।

कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पहले ही तुषार गांधी की चिंताओं पर विस्तार से विचार किया है और अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट दखल नहीं दे सकता। न्यायमूर्ति एम.एम.सुंदरेश और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने तुषार गांधी की याचिका को खारिज करते हुए यह भी कहा कि याचिका दायर करने में दो साल से अधिक का विलंब हुआ है, और इस तरह की याचिकाओं को केवल आशंकाओं के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।

महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी ने गुजरात उच्च न्यायालय के 2022 के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना को बरकरार रखा था। तुषार गांधी का कहना था कि यह ₹1200 करोड़ की परियोजना आश्रम की सादगी को नष्ट कर देगी और इसे गांधीवादी विचारों से दूर, एक राज्य-नियंत्रित स्मारक में बदल देगी। उनका आरोप था कि इस परियोजना में गांधीवादी मूल्यों के खिलाफ आधुनिक सुविधाओं जैसे संग्रहालय, एम्फीथिएटर और फूड कोर्ट को शामिल किया गया है, जो गांधी के विचारों से मेल नहीं खाते।

गुजरात उच्च न्यायालय ने तुषार गांधी की याचिका पर 2022 में फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया था कि प्रस्तावित पुनर्विकास परियोजना के दौरान पांच एकड़ में फैले मुख्य आश्रम परिसर को नहीं छुआ जाएगा, जिससे आश्रम की स्थलाकृति पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी।

दो साल बाद तुषार गांधी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यदि परियोजना से संबंधित आशंकाएं हैं, तो वह सिर्फ याचिकाकर्ता का व्यक्तिगत विचार है और कोर्ट इसे आधार बनाकर आदेश नहीं दे सकता। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका में देरी हुई है और इसे अब स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकार के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि अब साबरमती आश्रम पुनर्विकास परियोजना पर कोई कानूनी अड़चन नहीं रही। परियोजना का उद्देश्य आश्रम को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है, लेकिन इस पर गांधीवादी सादगी और मूल्यों की रक्षा करने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है।

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