April 18, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में महिला को बरी किया

दिल्ली से एक अहम कानूनी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महिला को बरी कर दिया, जिस पर अपनी बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोप हवा से भी तेज फैलते हैं, लेकिन अगर ठोस सबूत न हों तो दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। निचली अदालत और हाई कोर्ट ने महिला को तीन साल की सजा सुनाई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलटते हुए राहत दी।

 

यह मामला उत्तराखंड का है। पीड़िता के पिता ने 2001 में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी गर्भवती बेटी अपने वैवाहिक घर में मृत पाई गई थी। पिता ने आरोप लगाया था कि बेटी को दहेज को लेकर उसकी सास ताने मारती थी। इस मामले में सास, ससुर और देवर को आरोपी बनाया गया था, क्योंकि पति घर पर नहीं रहता था। ट्रायल कोर्ट ने ससुर और देवर को बरी कर दिया, लेकिन महिला को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि मुख्य गवाह एक पड़ोसन थी, जिसके पास यह साबित करने के लिए ठोस सबूत नहीं थे कि बहू को दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था। अदालत ने कहा कि धारा 498-ए जैसे मामलों में जांच बेहद संवेदनशील और तथ्य आधारित होनी चाहिए। केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसी आधार पर महिला को दोषमुक्त कर दिया गया।

 

इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में सामाजिक दबाव और अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं। लेकिन न्यायालय का निर्णय सिर्फ तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर होना चाहिए। यह फैसला ऐसे कई मामलों के लिए मिसाल बन सकता है, जहां बिना पुख्ता सबूत के आरोप लगाए जाते हैं।

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