उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र स्थित कपसाड गांव में एक दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के कथित अपहरण के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। घटना के बाद से गांव में पिछले 30 घंटे से लगातार हंगामा चल रहा है। मृतक महिला का शव गांव में ही रखकर दलित समाज और परिजन प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि जब तक पुलिस अगवा की गई लड़की को सुरक्षित बरामद नहीं करती, तब तक शव का अंतिम संस्कार नहीं होने दिया जाएगा। स्थिति को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
परिजनों के मुताबिक, मृतक महिला सुनीता अपनी बेटी के साथ घर लौट रही थी, तभी गांव के ही रहने वाले पारस राजपूत ने लड़की को अगवा करने की कोशिश की। आरोप है कि जब सुनीता ने इसका विरोध किया तो पारस ने गंडासे से उसके सिर पर वार कर दिया। गंभीर रूप से घायल सुनीता को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद से लड़की लापता है। इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश फैला दिया है और दलित समाज के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं।
वहीं, आरोपी पारस राजपूत के परिजनों ने मामले को अलग ही मोड़ देने की कोशिश की है। उनका कहना है कि पारस नाबालिग है, जबकि लड़की बालिग है और दोनों के बीच पहले से प्रेम प्रसंग था। परिजनों का दावा है कि दोनों को पहले भी आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया था, जिसके बाद पंचायत में समझौता हुआ था और 50 हजार रुपये भी दिए गए थे। उनका यह भी कहना है कि घटना वाले दिन लड़की ने ही पारस को फोन कर बुलाया था और विवाद के दौरान हमला उसी ने किया। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम और एसएसपी खुद गांव में मौजूद हैं। एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने बताया कि लड़की की बरामदगी और आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस की पहली प्राथमिकता है। इसके लिए 10 विशेष पुलिस टीमें गठित की गई हैं, जो अलग-अलग संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की जा रही है और केस में हत्या की धाराएं जोड़ दी गई हैं। गांव में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कई थानों की फोर्स तैनात की गई है।
इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सपा की महिला कार्यकर्ता मृतक के घर पहुंचीं और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अधिकारियों पर चूड़ियां फेंकीं। वहीं सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान को पुलिस ने गांव में प्रवेश नहीं करने दिया, जिसके बाद वह गांव के बाहर ही धरने पर बैठ गए। उधर भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्रशेखर ने वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित परिवार और प्रशासनिक अधिकारियों से बात की और चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल गांव में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है और पुलिस लगातार हालात को काबू में रखने की कोशिश कर रही है।
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