April 17, 2026

बेंगलुरु में शुरू हुई RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर होगी चर्चा

बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक का आज उद्घाटन हुआ। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बैठक की शुरुआत की, जिसमें संघ से जुड़े 32 संगठनों के करीब 1480 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी, जिनमें बांगलादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न और संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान की योजनाओं पर विचार किया जाएगा।

संघ के विस्तार पर चर्चा

आरएसएस के सह सरकार्यवाह मुकुंद सीआर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बैठक की शुरुआत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल आरएसएस ने 10,000 शाखाएं और खोली हैं, जिनमें विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इस समय देश भर के 58,981 स्थानों पर संघ की शाखाएं कार्यरत हैं, जबकि 30,770 स्थानों पर साप्ताहिक कार्यक्रम चल रहे हैं। इनमें से 9,200 शाखाएं तो पूरी तरह मंडल स्तर पर आयोजित हो रही हैं। इसके अलावा, संघ में अब तक 12 लाख से ज्यादा लोग शामिल होने के लिए उत्सुक हैं, जिनमें करीब 46,000 महिलाएं भी शामिल हैं।

मुकुंद सीआर ने आगे बताया कि संघ ने समाज में विशिष्ट योगदान देने वाले कई प्रमुख व्यक्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इन व्यक्तियों में स्वामी प्रणवानंद, शिरीष महाराज जी मोरे, श्याम बेनेगल, तुलसी गौड़ा, विवेक देवराय जैसे कई महान हस्तियों के नाम शामिल हैं।

संघ के शताब्दी वर्ष पर प्रस्ताव

इस साल संघ की स्थापना के 100 साल पूरे हो रहे हैं, और इस महत्वपूर्ण अवसर पर संघ ने एक प्रस्ताव पास करने का निर्णय लिया है, जिसमें संघ के पिछले 100 सालों की यात्रा, उसकी उपलब्धियां और आने वाले समय में संघ की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। यह प्रस्ताव संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों और गतिविधियों पर आधारित होगा, जो 2025 के विजयादशमी से लेकर 2026 के विजयादशमी तक मनाए जाएंगे।

बांगलादेश में हिंदू उत्पीड़न पर प्रस्ताव

बैठक में दूसरा महत्वपूर्ण प्रस्ताव बांगलादेश में हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न को लेकर होगा। संघ इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने के लिए अपने कार्यों और योजनाओं पर चर्चा करेगा, ताकि बांगलादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और उन्हें अपने अधिकारों का सम्मान मिले।

क्या कहता है संघ का नेतृत्व?

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस सभा के उद्घाटन पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि संघ का उद्देश्य समाज के हर वर्ग के बीच जागरूकता फैलाना और देशभर में एक मजबूत और सशक्त समाज का निर्माण करना है। उन्होंने संघ के कार्यकर्ताओं को सामाजिक और धार्मिक उत्थान के लिए आगे आने की प्रेरणा दी। साथ ही, उन्होंने वर्तमान समय में संघ की भूमिका और उसके सामाजिक योगदान को रेखांकित किया।

बैठक का महत्व

RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की यह बैठक संघ के लिए एक अहम अवसर है, क्योंकि इसके दौरान ना केवल संघ की कार्य योजनाओं पर चर्चा होगी, बल्कि यह बैठक संघ के कार्य विस्तार और राष्ट्रीय मुद्दों पर संघ के दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करेगी। बांगलादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे उत्पीड़न को लेकर संघ का रुख निश्चित रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश देगा।

इस बैठक में संघ के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ-साथ हजारों प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जो संघ के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। संघ द्वारा पास किए जाने वाले इन प्रस्तावों के परिणामस्वरूप भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में एक नया मोड़ आ सकता है, खासकर बांगलादेश में हिंदू उत्पीड़न के मामले को लेकर।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, यह बैठक RSS के लिए एक ऐतिहासिक पल है, क्योंकि संघ अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ रहा है और इस अवसर पर उसे अपनी यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर विचार करने का मौका मिल रहा है। बांगलादेश में हिंदू उत्पीड़न पर चर्चा, संघ के विस्तार और संगठन के मजबूत होने की दिशा में किए गए प्रयास, इस बैठक के सबसे बड़े मुद्दे हैं।

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