गाजियाबाद में बीजेपी विधायक और पुलिस के बीच भिड़ंत, क्या गिलोटिन से मोदी सरकार का बजट होगा पास?
भारत के संसद सत्र में मोदी सरकार की बजट पास कराने की रणनीति ने नया मोड़ लिया है। जहां एक ओर बीजेपी ने अपने सांसदों को लोकसभा में शुक्रवार को मौजूद रहने का आदेश दिया है, वहीं कांग्रेस भी अपने सदस्यों को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर चुकी है। इसके बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि मोदी सरकार संसद में अपने वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट को पास करने के लिए लोकसभा में “गिलोटिन” की प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकती है। अब सवाल उठता है कि गिलोटिन क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है? क्या सरकार इस ‘जादू की छड़ी’ का उपयोग करके बजट को जल्द पास करवा सकेगी?
गिलोटिन का क्या अर्थ है?
गिलोटिन शब्द का सामान्य अर्थ तो एक खौ़फनाक सजा से जुड़ा हुआ है, जिसे विशेष रूप से किसी को मौत की सजा देने के लिए प्रयोग किया जाता था। गिलोटिन एक लंबी लकड़ी के फ्रेम से बनी एक धातु की धारदार ब्लेड के साथ होती थी, जो अत्यधिक तेजी से गिरकर किसी का सिर धड़ से अलग कर देती थी। यह यंत्र फ्रांस की क्रांति के दौरान प्रसिद्ध हुआ, लेकिन भारतीय संसद की प्रक्रिया में इसका अर्थ कुछ अलग है।
संसदीय प्रक्रिया में गिलोटिन का क्या काम होता है?
भारत में गिलोटिन का इस्तेमाल एक Parliamentary प्रक्रिया के तौर पर होता है, जब सरकार को बजट पास कराने के लिए समय की कमी होती है या जब संसद में किसी प्रकार का गतिरोध हो। गिलोटिन का अर्थ है कि सरकार उन सभी मंत्रालयों से संबंधित अनुदान मांगों को एक साथ बिना चर्चा के एक ही बार में पास करवा लेती है। आमतौर पर इस प्रक्रिया का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई मंत्रालय किसी वित्तीय बिल पर लंबी चर्चा के लिए समय नहीं दे पा रहा हो। गिलोटिन का उद्देश्य बजट के विभिन्न हिस्सों को बिना किसी बहस के पारित करवाना होता है ताकि सरकार को किसी प्रकार की रुकावट के बिना अपने कार्यों को जारी रखने का मौका मिले।
सरकार क्यों कर रही है गिलोटिन का इस्तेमाल?
बीजेपी की सरकार ने 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश किया था और इसके बाद से बजट सत्र का दूसरा चरण 10 मार्च से शुरू हो चुका है। 4 अप्रैल तक यह सत्र समाप्त होना है और इससे पहले सरकार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बजट को पास कराना आवश्यक है। ऐसे में मोदी सरकार ने गिलोटिन का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। इसके जरिए सरकार सुनिश्चित करना चाहती है कि बजट समय पर पास हो जाए, ताकि किसी भी तरह की देरी न हो और किसी प्रकार का हंगामा उसे रोक न सके।
गिलोटिन का उपयोग कब और क्यों किया गया?
संसदीय प्रक्रिया में गिलोटिन का इस्तेमाल समय की कमी या विपक्ष के हंगामे के दौरान किया जाता है। भारत में कई बार गिलोटिन का सहारा लिया गया है, खासकर जब बजट सत्र के दौरान वित्तीय विधेयक पर लंबी चर्चा नहीं हो पाई। उदाहरण के तौर पर, मोदी सरकार ने 2018-19 में भी गिलोटिन का इस्तेमाल किया था और उसी तरह 2020-21 में दिल्ली हिंसा के कारण संसद में गतिरोध के चलते सारे वित्तीय विधेयक बिना किसी चर्चा के पास कराए थे। इससे पहले, कांग्रेस सरकार के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने भी 2004-05 और 2013-2014 में गिलोटिन का सहारा लिया था, जब बजट की लंबी चर्चा संभव नहीं हो पाई थी।
बीजेपी और कांग्रेस के व्हिप
मोदी सरकार को बजट को पास कराने में कोई रुकावट न आए, इसलिए बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है, जिसके तहत उन्हें शुक्रवार को लोकसभा में मौजूद रहकर वोटिंग में हिस्सा लेने के लिए कहा गया है। वहीं, कांग्रेस ने भी अपने सांसदों को इस दिन सदन में मौजूद रहने का आदेश दिया है, जिससे यह साफ हो गया है कि विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया देने की तैयारी कर रहे हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष इस गिलोटिन प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जता सकता है, क्योंकि गिलोटिन के माध्यम से विपक्ष को बहस और संशोधन का मौका नहीं मिलता। विपक्ष का मानना है कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की आवाज को दबाने का तरीका हो सकती है और इससे संसदीय परंपरा का उल्लंघन होता है।
क्या गिलोटिन के इस्तेमाल से बजट पास होगा?
अब सवाल यह उठता है कि क्या मोदी सरकार इस गिलोटिन की “जादू की छड़ी” का उपयोग करके बजट को समय पर पास करवा पाएगी? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि बजट सत्र में बिना किसी रुकावट के सभी वित्तीय विधेयक पास कराए जाएं। हालांकि, विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर विरोध कर सकता है, लेकिन गिलोटिन के जरिए सरकार को यह सुनिश्चित करने का मौका मिलेगा कि बजट सही समय पर पारित हो सके और सरकार का कार्य सुचारु रूप से जारी रहे।
इससे यह सवाल भी पैदा होता है कि क्या इस प्रकार के असाधारण कदमों से संसद के कामकाज की पारदर्शिता प्रभावित होती है और क्या इसके असर से संसद में और भी अधिक गतिरोध पैदा हो सकता है?
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