May 2, 2026

मौलाना महमूद मदनी ने आरएसएस प्रमुख भागवत की सराहना की, अमेरिका के टैरिफ पर सरकार का किया समर्थन

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने शुक्रवार को एक अहम बयान दिया, जिसमें उन्होंने मुस्लिम समुदायों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयानों का स्वागत किया और उन्हें सकारात्मक पहल बताया। साथ ही उन्होंने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के रुख का समर्थन किया। मदनी ने कहा कि भारत को किसी भी तरह से झुकना नहीं चाहिए और समानता के आधार पर ही किसी समझौते को स्वीकार करना चाहिए।

मदनी ने अमेरिकी टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत को मजबूती से खड़ा रहना होगा। उन्होंने कहा, “हम आधी रोटी खा लेंगे लेकिन झुकेंगे नहीं। किसी भी तरह का समझौता तभी होना चाहिए जब दोनों पक्ष बराबरी की स्थिति में हों।” उन्होंने पीएम मोदी की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार की आर्थिक और रणनीतिक नीतियों में आत्मनिर्भरता और दृढ़ता का भाव झलकता है। मदनी का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, जिसे लेकर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में बहस जारी है।

वहीं, धार्मिक मुद्दों पर भी मदनी ने अपनी बात रखी। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा-काशी विवाद पर भागवत की टिप्पणियों को रचनात्मक करार देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय और आरएसएस के बीच संवाद बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मतभेद भले ही हों, लेकिन उन्हें बातचीत के जरिए कम किया जा सकता है। मदनी ने यह भी बताया कि उनके संगठन ने बातचीत को समर्थन देने के लिए प्रस्ताव पास किया है और वह हर उस प्रयास में शामिल होंगे जिससे दोनों समुदायों के बीच समझ और सहयोग बढ़े।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा था कि राम मंदिर ही एकमात्र आंदोलन है जिसे संघ ने आधिकारिक तौर पर समर्थन दिया था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सदस्य काशी और मथुरा के मुद्दों पर अपनी राय रख सकते हैं। उन्होंने भारत में इस्लाम की स्थायी उपस्थिति पर जोर देते हुए जनसांख्यिकी संतुलन को बनाए रखने की बात कही और धर्मांतरण व अवैध प्रवासन को असंतुलन का कारण बताया। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मदनी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय तक पहुंचने और संवाद स्थापित करने का भागवत का प्रयास स्वागत योग्य है।

मदनी ने पहलगाम आतंकी हमले पर भी अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि यह हमला देश के भीतर अस्थिरता पैदा करने की साजिश थी, लेकिन इसे नागरिक समाज और सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हमला किसी और देश में हुआ होता, तो बड़ा हंगामा मच जाता। मदनी ने मौजूदा सरकार की सुरक्षा नीति को पिछली सरकारों से बेहतर बताते हुए कहा कि आज कानून प्रवर्तन एजेंसियां ज्यादा पेशेवर हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि इन एजेंसियों को और ज्यादा समावेशी बनने की जरूरत है।

मौलाना मदनी ने अंत में राजनीतिक भाषा की गिरती गुणवत्ता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के नेता अक्सर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय देश को संवाद, सहयोग और सकारात्मक राजनीति की सबसे ज्यादा जरूरत है, ताकि आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का मजबूती से सामना किया जा सके।

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