अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने अपने विदेशी निवेशक को ऐसा रिटर्न दिया है, जिसकी गूंज अब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। फ्रांस की दिग्गज ऊर्जा कंपनी TotalEnergies अब अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचने की तैयारी में है, क्योंकि उसे AGEL में किए गए निवेश से सिर्फ चार साल में 220% का शानदार रिटर्न मिला है। 2021 में कंपनी ने लगभग 2.5 अरब डॉलर में यह हिस्सेदारी खरीदी थी, जबकि अब इसकी वैल्यू बढ़कर करीब 8 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।
कंपनी के पास इस समय Adani Green में लगभग 19% की हिस्सेदारी है, जिसे दो अलग-अलग सहायक कंपनियों के जरिए होल्ड किया गया है। अब रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इस हिस्सेदारी में से लगभग 6% बेच सकती है। अगर मौजूदा वैल्यूएशन के हिसाब से देखा जाए, तो इस बिक्री के जरिए TotalEnergies को करीब 10,200 करोड़ रुपये (लगभग 1.14 अरब डॉलर) तक मिल सकते हैं। यह कदम कंपनी की वित्तीय रणनीति और कर्ज कम करने की योजना के अनुरूप बताया जा रहा है।
TotalEnergies के CEO पैट्रिक पॉयाने ने हाल ही में यह भी स्पष्ट कर दिया था कि कंपनी अब अडानी ग्रुप के साथ अपनी ग्रीन एनर्जी साझेदारी को आगे नहीं बढ़ाएगी। हालांकि उन्होंने यह स्वीकारा कि अडानी ग्रीन आज भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की तेज़ी से उभरती हुई रिन्युएबल एनर्जी कंपनियों में से एक है। TotalEnergies ने 2021 में निवेश के साथ कंपनी के बोर्ड में एक सीट भी हासिल की थी।
अडानी ग्रीन एनर्जी की बात करें तो यह 2015 में स्थापित हुई थी और अब यह भारत की सबसे बड़ी रिन्युएबल एनर्जी कंपनियों में शुमार है। वर्तमान में इसकी ऑपरेशनल क्षमता 16.6 GW से अधिक है। कंपनी का लक्ष्य है कि वह 2030 तक अपनी क्षमता को बढ़ाकर 50 GW कर दे। इसी क्रम में गुजरात के खावड़ा में दुनिया का सबसे बड़ा रिन्युएबल एनर्जी प्लांट विकसित किया जा रहा है, जो 538 वर्ग किलोमीटर में फैला होगा—यानी पेरिस के आकार से पांच गुना बड़ा।
टोटल और अडानी की साझेदारी सिर्फ सोलर या विंड ऊर्जा तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां गैस कारोबार में भी भागीदार हैं और 2018 से मिलकर LNG टर्मिनल, शहरी गैस वितरण और गैस मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
कुल मिलाकर इस डील ने साबित किया है कि भारत का रिन्युएबल एनर्जी सेक्टर तेज़ी से वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीत रहा है। TotalEnergies की हिस्सेदारी बेचने की योजना जहां उसकी निवेश रणनीति का हिस्सा है, वहीं यह अडानी ग्रीन की मजबूत बाजार स्थिति का भी प्रमाण है। इस सौदे पर अब बाज़ार और निवेशकों की नजरें टिक गई हैं, क्योंकि इससे भारतीय ग्रीन एनर्जी सेक्टर में नए बदलाव देखने की उम्मीद है।
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