रूस-अमेरिका के बीच एटमी युद्ध की आशंका, ट्रंप की दो बार चेतावनी से बढ़ा वैश्विक तनाव
अमेरिका और रूस के बीच परमाणु युद्ध की आशंका एक बार फिर गहराने लगी है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 घंटे के भीतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दो बार एटमी चेतावनी दी है। ट्रंप ने एक बार फिर सार्वजनिक तौर पर कहा है कि अमेरिका एटमी युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके जवाब में रूस ने भी अपनी परमाणु ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है। दोनों देशों की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने पूरी दुनिया में चिंता की लहर दौड़ा दी है।
ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रूस के पूर्व राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद के प्रमुख मेदवेदेव ने जिस तरह से न्यूक्लियर युद्ध की बातें की हैं, उससे अमेरिका को सतर्क रहने की जरूरत है। ट्रंप ने कहा, “जब कोई न्यूक्लियर की बात करता है तो मेरी आंखें खुल जाती हैं। यह बहुत बड़ा खतरा है, इसलिए मैं इसे सिर्फ शब्दों में नहीं छोड़ सकता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि इसी कारण अमेरिका ने अपनी न्यूक्लियर सबमरीन रूस के करीब भेजी हैं।
जानकारी के मुताबिक अमेरिका की दो न्यूक्लियर सबमरीन रूस के आसपास के समुद्री क्षेत्रों — बैरेंट्स या नॉर्वेजियन सागर — में तैनात हैं। इन पनडुब्बियों से पूरा रूस अमेरिकी रडार पर है। अमेरिका ने इनकी सटीक लोकेशन रूस को नहीं बताई है। ये सबमरीन जरूरत पड़ने पर नाटो (NATO) के नौसैनिक अड्डों का भी इस्तेमाल कर सकती हैं। अमेरिका की इस तैनाती के जवाब में अब रूस ने भी अपनी प्रतिक्रिया में परमाणु रणनीति अपनानी शुरू कर दी है।
रूस ने दो न्यूक्लियर पनडुब्बियों को अमेरिका के नजदीक उत्तरी अटलांटिक महासागर में भेजा है। ये पनडुब्बियां अमेरिका के तटीय राज्यों जैसे फ्लोरिडा, जॉर्जिया, साउथ कैरोलाइना, न्यू यॉर्क और पेंसिलवेनिया तक को निशाने पर ले सकती हैं। इन पनडुब्बियों पर अंडरवॉटर पोसाइडन ड्रोन और मिसाइलें लोड की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से किसी भी पनडुब्बी से छोड़ा गया पोसाइडन विस्फोट समुद्र में भूकंप जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे रेडियोएक्टिव सुनामी उठकर अमेरिकी तटों को तबाह कर सकती है।
इस एटमी खींचतान ने पूरी दुनिया को एक बार फिर शीत युद्ध जैसी स्थिति की याद दिला दी है। जहां एक ओर अमेरिका अपनी सामरिक स्थिति को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है, वहीं रूस भी हर मोर्चे पर जवाबी तैयारी में जुट गया है। दोनों शक्तियों की परमाणु पनडुब्बियां अगर आमने-सामने आती हैं, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है, जिससे वैश्विक स्थिरता को बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है।
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