अयोध्या में 23 जनवरी को प्रस्तावित रक्षा मंत्रालय की 32 सदस्यीय संसदीय समिति के दौरे को लेकर सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस समिति में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के शामिल होने के बाद यह कयास लगाए जाने लगे कि वे इस अवसर पर राम मंदिर जाकर रामलला के दर्शन कर सकते हैं। इन अटकलों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी को आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।
रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की आधिकारिक यात्रा योजना के अनुसार, समिति का दौरा 17 जनवरी को कोच्चि से शुरू होगा। इसके बाद बेंगलुरू, विशाखापत्तनम और भुवनेश्वर होते हुए 22 जनवरी को वाराणसी में बैठक प्रस्तावित है। कार्यक्रम के मुताबिक, 22 जनवरी की शाम करीब 5 बजे समिति का आधिकारिक दौरा समाप्त हो जाएगा। इसके बाद समिति के सभी सदस्य अपने-अपने निजी कार्यक्रमों या गंतव्य के लिए स्वतंत्र होंगे। यात्रा कार्यक्रम में अयोध्या में राम मंदिर दर्शन या किसी अन्य धार्मिक स्थल पर जाने का कोई आधिकारिक उल्लेख नहीं है।
कांग्रेस सूत्रों ने साफ शब्दों में कहा है कि राहुल गांधी के रामलला के दर्शन को लेकर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह निराधार हैं। पार्टी का कहना है कि संसदीय समिति का उद्देश्य रक्षा मंत्रालय से जुड़े कार्यों की समीक्षा और कैंट क्षेत्र का निरीक्षण करना है, न कि धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेना। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नाम को जानबूझकर इस मुद्दे से जोड़ा जा रहा है ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके और अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्रालय की इस संसदीय समिति के अध्यक्ष बिहार के पूर्वी चंपारण से भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह हैं। समिति के अयोध्या पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद यह माना गया कि कई सांसद रामलला के दर्शन कर सकते हैं, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि यह व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, न कि समिति के आधिकारिक एजेंडे का हिस्सा। राहुल गांधी के संदर्भ में पार्टी ने दोहराया कि उनके किसी भी धार्मिक दौरे को लेकर कोई पूर्व निर्धारित योजना नहीं है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी गांधी परिवार की ओर से राम मंदिर और रामलला के दर्शन को लेकर दूरी बनाए रखने की चर्चा होती रही है। 22 जनवरी 2024 को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमंत्रण सोनिया गांधी और राहुल गांधी को भेजा गया था, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने उस कार्यक्रम में शामिल न होने का निर्णय लिया था। हालांकि बाद के समय में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता व्यक्तिगत रूप से राम मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे, लेकिन गांधी परिवार ने सार्वजनिक रूप से इस विषय पर कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया। ऐसे में मौजूदा दौरे को लेकर कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी के अयोध्या जाने या रामलला के दर्शन करने की खबरें महज अटकलें हैं, जिनका आधिकारिक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।
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