UN Report: दुनिया के 210 करोड़ लोग पी रहे गंदा पानी, हर चौथा इंसान सुरक्षित पेयजल से वंचित
UN Report: दुनिया के 210 करोड़ लोग पी रहे गंदा पानी, हर चौथा इंसान सुरक्षित पेयजल से वंचि
संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट ने दुनिया के सामने गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्वभर में 210 करोड़ से भी अधिक लोगों को अभी तक साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पाया है। यानी दुनिया का हर चौथा इंसान गंदा पानी पीने को मजबूर है। यह स्थिति न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए खतरा है बल्कि विकासशील और गरीब देशों में जीवन स्तर पर भी गहरा असर डाल रही है। संयुक्त राष्ट्र ने साफ तौर पर कहा है कि पेयजल, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से अरबों लोग बीमारियों से जूझ रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ ने भी रिपोर्ट में चिंता जताते हुए कहा कि साफ पानी और स्वच्छता को विशेषाधिकार नहीं बल्कि मौलिक मानवाधिकार माना जाना चाहिए। WHO के पर्यावरण प्रमुख रूडिगर क्रेच ने चेतावनी दी कि जब तक पेयजल और स्वच्छता को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर कदम नहीं उठाए जाते, तब तक 2030 तक सुरक्षित जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अभी भी 10 करोड़ से अधिक लोग पीने के पानी के लिए नदियों, तालाबों और नहरों जैसे असुरक्षित सतही जल स्रोतों पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट में ड्रिंकिंग वाटर को पांच श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में वह सुरक्षित पानी आता है, जो घर तक पहुंचे और उसमें किसी तरह की गंदगी या रासायनिक तत्व न हों। दूसरी श्रेणी बुनियादी पेयजल की है, जिसे 30 मिनट से कम समय में पाया जा सकता है। तीसरी श्रेणी सीमित जल है, जिसमें पानी तो साफ होता है लेकिन उसे हासिल करने में अधिक समय लगता है। चौथी श्रेणी गंदे स्रोतों जैसे खराब कुएं या झरनों से मिलने वाले पानी की है और पांचवीं श्रेणी सतही जल की है, जो सबसे असुरक्षित मानी जाती है।
हालांकि कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। 2015 से अब तक लगभग 96 करोड़ लोगों को साफ पेयजल उपलब्ध कराया गया है। रिपोर्ट बताती है कि इस दौरान लोगों तक साफ पानी की पहुंच 68% से बढ़कर 74% हो गई है। वहीं, सतही जल पर निर्भर रहने वाले लोगों की संख्या में पिछले दशक की तुलना में 6.1 करोड़ की कमी दर्ज की गई है। 2015 में जहां 142 देशों में लोग सतही जल का इस्तेमाल करते थे, वहीं 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 154 देशों तक पहुंच गया है। इनमें से सबसे अधिक प्रभावित देश अफ्रीका के हैं, जहां अब भी 4 में से एक से ज्यादा लोगों को बुनियादी सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
स्वच्छता सेवाओं के मामले में भी कुछ सुधार दिखा है। 2015 से अब तक 1.6 अरब लोगों को बुनियादी स्वच्छता सेवाओं तक पहुंच मिली है। खुले में शौच करने वाले लोगों की संख्या भी घट रही है। 2015 में यह आंकड़ा करीब 43 करोड़ था, जो 2024 तक घटकर 35 करोड़ पर आ गया। यह दुनिया की कुल आबादी का करीब 4% है। इसके अलावा हाथ धोने की बुनियादी सुविधा वाले घरों की संख्या भी 66% से बढ़कर 80% तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद साफ पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी दुनिया की बड़ी आबादी को प्रभावित कर रही है, जिस पर तुरंत वैश्विक प्रयासों की आवश्यकता है।
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