दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने यह दावा किया कि शहीद भगत सिंह ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ विधानसभा में बम फेंका था। यह बयान उन्होंने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा के भीतर दिया। वीडियो सामने आने के बाद न सिर्फ सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इस पर बहस तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री के इस बयान को लेकर कई लोगों ने ऐतिहासिक तथ्यों पर सवाल खड़े किए हैं। आलोचकों का कहना है कि शहीद भगत सिंह का क्रांतिकारी आंदोलन आज़ादी से पहले ब्रिटिश शासन के खिलाफ था, न कि आज़ादी के बाद किसी भारतीय राजनीतिक दल या सरकार के विरोध में। इसी आधार पर विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री के बयान को तथ्यों से परे और भ्रामक बताया है।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री के वायरल वीडियो को साझा करते हुए कहा कि रेखा गुप्ता को यह तक ज्ञात नहीं है कि शहीद भगत सिंह आज़ादी से पहले के क्रांतिकारी थे। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि स्कूल के बच्चे भी जानते हैं कि भगत सिंह ने 1929 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली में ब्रिटिश सरकार के विरोध में बम फेंका था, न कि किसी कांग्रेस सरकार के खिलाफ।
कांग्रेस नेताओं ने भी इस बयान को शहीदों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ करार दिया है। उनका कहना है कि ऐसे बयान न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी भ्रमित कर सकते हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री को सार्वजनिक मंच से बोलते समय इतिहास और तथ्यों की सही जानकारी रखनी चाहिए।
फिलहाल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन उनका बयान लगातार राजनीतिक हमलों का केंद्र बना हुआ है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं के बयानों का असर समाज और इतिहास की समझ पर कितना गहरा पड़ सकता है।
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