April 19, 2026

गंगा किनारे बच्ची ‘मम्मी-मम्मी’ चिल्लाती रही, और मां तेज बहाव में बह गई!”

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जिसने रील्स की दीवानगी और लापरवाही के खतरनाक परिणाम को सबके सामने ला दिया है। महज 16 सेकंड का वो वीडियो जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए—एक मासूम बच्ची अपनी मां को भागीरथी की तेज धारा में बहते हुए देखती रही, चिल्लाती रही… लेकिन कोई उसे बचा नहीं पाया।

उत्तरकाशी के मणिकर्णिका घाट पर नेपाल मूल की एक 35 वर्षीय महिला, विशेषता, अपने परिवार के साथ घूमने आई थी। गंगा मंदिर के पास घाट किनारे खड़ी महिला ने अपनी बेटी को मोबाइल थमाया और कहा – “रील बनाना है!” बच्ची ने वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू ही की थी कि तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया।

रील बनाना पड़ा जानलेवा

महिला बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के भागीरथी नदी में उतर गई। पानी बेहद ठंडा था और बहाव इतना तेज़ कि एक सेकंड की चूक ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया। उसका पैर फिसला और वो सीधे नदी की लहरों में समा गई। कैमरा रिकॉर्ड कर रहा था… और मासूम बच्ची वहीं खड़ी चीख रही थी – “मम्मी… मम्मी…”

वीडियो में दिखाई देता है कि हादसे के बाद कुछ पल तक वहां मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। बच्ची की चीखें घाट पर गूंजती रहीं लेकिन जब तक लोग कुछ कर पाते, मां दूर बह चुकी थी।

रेस्क्यू में जुटा प्रशासन

जैसे ही घटना की खबर मिली, तुरंत पुलिस, एसडीआरएफ और क्यूआरटी की टीमें मौके पर पहुंचीं। जोशियाड़ा बैराज की झील और नदी में बोट उतारकर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। लेकिन देर शाम तक महिला का कोई सुराग नहीं लग पाया। सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है, लेकिन हर गुजरता पल उम्मीद को कमजोर करता जा रहा है।

रील के पीछे रियल लाइफ की कुर्बानी

इस घटना ने एक बार फिर समाज को झकझोर कर रख दिया है। सवाल ये नहीं कि रील कितनी अच्छी बनी, सवाल ये है कि क्या एक रील के लिए ज़िंदगी की कीमत वाजिब है? सोशल मीडिया पर लाइक्स, व्यूज और फॉलोअर्स के पीछे भागते-भागते लोग अब अपनी जान भी दांव पर लगाने लगे हैं।

सोशल मीडिया की लत या असावधानी?

प्रशासन ने भी इस घटना के बाद चेतावनी जारी की है कि पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नदी, झील, पहाड़ी इलाकों या किसी भी खतरनाक स्थान पर रील्स या वीडियो बनाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। सुरक्षा के नियमों की अनदेखी जानलेवा साबित हो सकती है, और यह घटना इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुकी है।

16 सेकंड का एक वीडियो, जो अब एक मासूम की जिंदगी भर की टीस बन गया है।
एक मां जो सिर्फ एक परफेक्ट रील बनाना चाहती थी, अब तक लापता है।
एक बच्ची जिसकी चीखें अब भी घाट की दीवारों से टकरा रही होंगी—“मम्मी… मम्मी…”

क्या ये वक़्त नहीं है हमें रुककर सोचने का… कि क्या सोशल मीडिया की लाइमलाइट, हमारे अपनों की ज़िंदगी से ज़्यादा कीमती हो गई है?

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