April 19, 2026

50 करोड़ में कुत्ता खरीदने का झूठा दावा पड़ा भारी, ईडी ने घर में मारी रेड, अब शुरू हुई गहरी पूछताछ

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक अजीबो-गरीब और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि उसने 50 करोड़ रुपये में एक विदेशी नस्ल का कुत्ता खरीदा है। यह दावा करना उसे भारी पड़ गया और मामला सीधा ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय तक पहुंच गया। ईडी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के उल्लंघन की आशंका में उस व्यक्ति के घर पर छापेमारी कर दी। यह छापा बेंगलुरु में रहने वाले डॉग ब्रीडर सतीश के घर मारा गया, जिसने सोशल मीडिया पर खुद यह दावा किया था।

मामला तब तूल पकड़ गया जब सतीश द्वारा किए गए दावे की खबर ईडी तक पहुंची। किसी भी लेनदेन में इतनी बड़ी रकम का जिक्र ईडी की नजरों में तुरंत आता है, खासकर तब जब मामला विदेशी नस्ल के कुत्ते से जुड़ा हो और पेमेंट का सोर्स संदिग्ध हो। ईडी की टीम सुबह-सुबह सतीश के घर पहुंची और उसे पूछताछ के लिए बैठा लिया गया। पूछताछ के दौरान ईडी की टीम ने सबसे पहले यह जानना चाहा कि 50 करोड़ रुपये की यह डील कैसे हुई और किस माध्यम से भुगतान किया गया। जब सतीश के बैंक खातों की जांच की गई तो सामने आया कि न तो इस तरह का कोई ट्रांजेक्शन हुआ है और न ही कोई बैंकिंग गतिविधि इस दावे की पुष्टि करती है। इससे यह संदेह गहरा गया कि कहीं यह पेमेंट हवाला या किसी अवैध चैनल से तो नहीं किया गया।

हालांकि जब सतीश से ईडी ने आमने-सामने बैठकर कड़ी पूछताछ की, तब असल कहानी सामने आई। शुरुआती जांच में ही यह साबित हो गया कि सतीश का 50 करोड़ रुपये में कुत्ता खरीदने का दावा पूरी तरह से झूठा था। इतना ही नहीं, जिस कुत्ते को वह विदेशी नस्ल का बता रहा था, उसकी नस्ल भी संदिग्ध पाई गई और वह देखने में पूरी तरह से देसी कुत्ता लग रहा था। सतीश की बातों में कोई ठोस आधार नजर नहीं आया और यह साफ हो गया कि उसने केवल सोशल मीडिया पर दिखावे और खुद को चर्चाओं में लाने के लिए यह सब किया था।

हालांकि ईडी ने अब भी पूछताछ जारी रखी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस झूठे दावे के पीछे कोई वित्तीय गड़बड़ी या संदिग्ध लेनदेन भी छिपा हुआ है। यदि जांच में कोई फाइनेंशियल फ्रॉड या विदेशी मुद्रा का अवैध उपयोग सामने आता है तो सतीश के खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

यह पूरा मामला सोशल मीडिया के उस दौर का प्रतीक है जहां लोग झूठी शान और दिखावे के चक्कर में खुद को मुश्किलों में डाल लेते हैं। सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए किए गए इस झूठे दावे ने अब सतीश को ईडी जैसी बड़ी जांच एजेंसी के रडार पर ला दिया है। फिलहाल जांच जारी है और यह देखना बाकी है कि इस मामले में आगे और क्या खुलासे होते हैं।

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