April 18, 2026

RBI का बैन, फिर बढ़ सकता है जमा बीमा की सीमा, ग्राहकों को मिलेंगे 5 लाख से ज्यादा रुपये!

महाराष्ट्र के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर आरबीआई द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद बैंक के बाहर लंबी कतारें लग गईं, जहां लोग अपनी जमा राशि को निकालने के लिए परेशान थे। इस दौरान, बैंक ग्राहकों को यह चेतावनी दी जाती रही है कि बैंक डूबने या चोरी होने की स्थिति में उन्हें केवल 5 लाख रुपये तक की राशि वापस मिलती है, चाहे उनके खाते में कितना भी पैसा जमा हो। हालांकि, अब एक नई संभावना सामने आई है, जिसके मुताबिक सरकार डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा को बढ़ा सकती है, जिससे ग्राहकों को बैंक के डूबने की स्थिति में 5 लाख से ज्यादा राशि मिल सकती है।

सरकार के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नागराजू ने हाल ही में कहा कि सरकार इस विषय पर सक्रियता से विचार कर रही है और अगर मंजूरी मिलती है तो इसे अधिसूचित किया जाएगा। यह बयान न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के कथित घोटाले के बाद सामने आया, जिसने इस विषय को और भी अहम बना दिया। नागराजू ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि वे जमा बीमा सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, ताकि ग्राहक का पैसा ज्यादा सुरक्षित रहे।

क्या है डिपॉजिट इंश्योरेंस का प्रावधान?

डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर तब लागू होता है जब कोई बैंक या ऋणदाता डूब जाता है। इस कवर के तहत, डीआईसीजीसी (डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन) बैंकों से प्रीमियम एकत्र करता है और किसी भी संकट की स्थिति में ग्राहक को बीमा कवर प्रदान करता है। वर्तमान में, डीआईसीजीसी द्वारा दावे का भुगतान किया जाता है, और इससे सहकारी ऋणदाताओं के मामले में अक्सर दावे किए जाते हैं।

हालांकि, यह सिस्टम हाल ही में फिर से चर्चा में आया, जब न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के साथ एक गंभीर घोटाला सामने आया। बैंक के 1.3 लाख जमाकर्ताओं में से लगभग 90 प्रतिशत की राशि अब बीमा कवर में आ जाएगी। जांच में पता चला है कि बैंक के महाप्रबंधक-वित्त हितेश मेहता ने कथित तौर पर बही-खाते में दर्शाई गई 122 करोड़ रुपये की नकदी का गबन किया, और उसे एक स्थानीय बिल्डर को दे दिया।

क्या हुआ न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में?

न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक में घोटाले के मामले ने बैंकिंग प्रणाली पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार और आरबीआई ने इसे लेकर ठोस कदम उठाए हैं। इस बैंक का संकट आने के बाद ही, यह सवाल सामने आया कि क्या डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा को बढ़ाया जा सकता है, ताकि बैंक डूबने पर ग्राहकों को ज्यादा राशि मिल सके। वर्तमान में, यह सीमा पांच लाख रुपये तक है, जिसे बढ़ाने पर सरकार विचार कर रही है।

अर्थशास्त्र के सचिव अजय सेठ ने बताया कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र आरबीआई की निगरानी में अच्छे से विनियमित है और इसमें संकट के बावजूद क्षेत्र की स्थिति मजबूत बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक बैंक के संकट को पूरे क्षेत्र पर आरोपित नहीं किया जा सकता है, और नियामक को दोषी इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

क्या आगे बढ़ेगा डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर?

फिलहाल, सरकार इस प्रस्ताव पर सक्रियता से विचार कर रही है, और अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो ग्राहकों को मिलने वाली रकम बढ़ाई जा सकती है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव के बयान से यह संकेत मिला है कि जल्द ही इस संबंध में अहम बदलाव हो सकते हैं।

इस समय, ग्राहकों को यह समझने की जरूरत है कि अगर उनका बैंक डूबता है तो पहले पांच लाख रुपये तक का कवर मिलेगा, लेकिन इस बदलाव से उन्हें अधिक सुरक्षा मिल सकती है। अब यह देखना होगा कि सरकार कब इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है और उसे लागू करती है।

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