April 18, 2026

वृंदावन: प्रेमानंद महाराज की विवादास्पद पदयात्रा का मुद्दा हल, सोसायटी अध्यक्ष ने मांगी माफी

वृंदावन: प्रेमानंद महाराज की विवादास्पद पदयात्रा का मुद्दा हल, सोसायटी अध्यक्ष ने मांगी माफी

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा अब विवादों से बाहर निकल चुकी है, और एक शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ चुकी है। संत प्रेमानंद महाराज ने रात 2 बजे अपनी पदयात्रा की शुरुआत की, जिस दौरान भक्तों का अपार सैलाब उमड़ पड़ा। यह पदयात्रा उसी पुराने रास्ते से निकाली गई, जिस पर पहले विवाद हुआ था। इस बार भक्तों ने संत महाराज के दर्शन किए, और यात्रा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया गया।

इस विवाद का मुख्य कारण एनआरआई ग्रीन सोसायटी के लोग थे, जिन्होंने 4 फरवरी को प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा का विरोध किया था। सोसायटी के निवासियों ने इस यात्रा के दौरान ध्वनि प्रदूषण और रात में होने वाली आतिशबाजी को लेकर शिकायत की थी। खासकर महिलाओं का कहना था कि रात के वक्त होने वाली पदयात्रा से उनकी नींद खराब होती थी, जिससे उनका पूरा दिन खराब हो जाता था। सोसायटी के विरोध के बाद, सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीव्र आलोचना हुई, और लोगों में नाराजगी फैल गई।

सोसायटी के अध्यक्ष आशु शर्मा ने इस विवाद के समाधान के लिए कदम बढ़ाया और प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। उन्होंने महाराज से माफी मांगी और स्वीकार किया कि सोसायटी के लोग अपनी गलती का एहसास कर चुके हैं। अध्यक्ष ने कहा, “हमारी गलती को स्वीकार करते हैं और हम आपसे माफी मांगते हैं।” सोसायटी के लोगों की ओर से भी यही संदेश गया कि वे अपने विरोध को समझने के बाद अब महाराज से माफी चाहते हैं।

इस माफी के बाद, प्रेमानंद महाराज ने अपनी पदयात्रा को फिर से जारी किया। भक्तों ने संत महाराज का स्वागत करते हुए रंगोली बनाई और यात्रा में शामिल हुए। प्रेमानंद महाराज ने कहा कि वह अपनी पुरानी समय-सारणी के अनुसार, रात 2 बजे से पदयात्रा करेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे, जैसे पहले हुआ करता था।

यह विवाद शुरू में काफी गहरा हो गया था, और कई व्यापारियों ने अपनी दुकानों पर पोस्टर चिपकाए थे, जिसमें लिखा था कि एनआरआई ग्रीन सोसायटी के लोगों से वे अब सामान नहीं खरीदेंगे। अब जब माफी मांगी गई और संत महाराज ने पदयात्रा को फिर से बिना रुकावट के शुरू किया, तो सोसायटी के लोग भी संतुष्ट दिखाई दिए।

वृंदावन की इस धार्मिक घटना ने यह संदेश दिया कि अगर विवादों को शांति और समझदारी से सुलझाया जाए, तो समाधान संभव है। अब स्थिति सामान्य हो गई है और संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा बिना किसी व्यवधान के जारी रहेगी।

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