भारतीय नोटों पर सिर्फ महात्मा गांधी की तस्वीर क्यों? आरबीआई ने पहली बार बताई असली वजह
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक डॉक्यूमेंट्री के ज़रिए उस सवाल का जवाब दिया है जो लंबे समय से लोगों के मन में था – आखिर भारतीय नोटों पर महात्मा गांधी की ही तस्वीर क्यों होती है, किसी और महान व्यक्ति की क्यों नहीं?
दरअसल, RBI ने स्पष्ट किया कि नोट पर किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की तस्वीर छापने का मकसद यह था कि आम जनता के लिए नकली और असली नोटों की पहचान आसान हो जाए। नोट पर जानी-पहचानी छवि लोगों को तुरंत सतर्क कर देती है।
महात्मा गांधी की तस्वीर तय करने से पहले रवींद्रनाथ टैगोर, मदर टेरेसा और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नामों पर भी विचार हुआ था, लेकिन अंततः गांधी जी पर आम सहमति बनी क्योंकि वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे व्यापक और सर्वमान्य प्रतीक हैं।
आज़ादी से पहले क्या होता था नोटों पर?
ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय नोटों पर सजावटी हाथी, बाघ, हिरण और राजा के चित्र होते थे। इसमें साम्राज्य की भव्यता झलकती थी। आज़ादी के बाद शुरू में अशोक स्तंभ, वैज्ञानिक उपलब्धियां और किसानों की तस्वीरें छपने लगीं, जिससे भारत की विकास यात्रा दर्शाई गई।
गांधी जी की तस्वीर की शुरुआत कब हुई?
1969 में पहली बार, उनकी जन्म शताब्दी पर 100 रुपये का स्मारक नोट जारी किया गया।
1987 में नियमित रूप से गांधी जी की तस्वीर 500 रुपये के नोट पर छपी।
फिर 1996 में “महात्मा गांधी सीरीज़” शुरू हुई, जिसमें नई तकनीक और सुरक्षा फीचर्स के साथ उनकी तस्वीर हर मूल्यवर्ग के नोट पर छपने लगी।
नोट पूरे देश में कैसे पहुंचते हैं?
RBI की डॉक्यूमेंट्री ‘RBI Unlocked: Beyond the Rupee’ में बताया गया है कि कैसे प्रिंटिंग प्रेस से नोट देश के कोने-कोने तक रेल, हवाई जहाज़, हेलिकॉप्टर और जलमार्ग के ज़रिए पहुंचाए जाते हैं। खासकर लक्षद्वीप जैसे इलाकों में जलमार्ग, जबकि नक्सल प्रभावित जिलों में हवाई माध्यम का इस्तेमाल होता है।
यह डॉक्यूमेंट्री पहली बार जनता के सामने यह स्पष्ट रूप से लाती है कि भारतीय मुद्रा व्यवस्था के पीछे कितनी विस्तृत और सुरक्षित रणनीति काम करती है — और गांधी जी की तस्वीर सिर्फ प्रतीक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चयन भी है।
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