रामनवमी पर पहली बार ड्रोन से सरयू की फुहारें, रामपथ पर बिछेगा आस्था का अनूठा मंज़र
इस बार रामनवमी पर रचा जाएगा इतिहास: पहली बार ड्रोन से बरसेगा सरयू का पवित्र जल, रामपथ पर उतरेगा आस्था और तकनीक का अद्भुत संगम
अयोध्या नगरी एक बार फिर आस्था की लहरों से सराबोर होने को तैयार है, लेकिन इस बार एक नया इतिहास भी रचा जाएगा। रामनवमी 2025 पर अयोध्या केवल धार्मिक आयोजन का केंद्र नहीं होगी, बल्कि तकनीक और संस्कृति का ऐसा समन्वय प्रस्तुत करेगी, जिसकी गूंज देश ही नहीं, विदेशों तक सुनाई देगी।
जिला प्रशासन ने इस वर्ष श्रीराम जन्मोत्सव को भव्य और यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियाँ की हैं। जिलाधिकारी चंद्र विजय सिंह ने जानकारी दी कि इस बार पहली बार श्रद्धालुओं पर ड्रोन की मदद से सरयू नदी के पवित्र जल की फुहारें डाली जाएंगी। यह दृश्य न केवल भक्तों के लिए अद्वितीय अनुभव होगा, बल्कि अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता को आधुनिक तकनीक के माध्यम से एक नई ऊँचाई देगा।
रामनवमी के अवसर पर विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी रूपरेखा तैयार की गई है। अयोध्या के हर कोने से श्रीराम के गुणगान में गूंजते सोहर, भजन और भक्ति गीत श्रद्धालुओं को भावविभोर कर देंगे। स्थानीय कलाकारों से लेकर नामचीन मंडलियाँ तक, सब रामजन्मोत्सव को अनुपम बनाने में जुटे हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए राम मंदिर में सुगम दर्शन की व्यवस्था की गई है। डिजिटल क्यू लाइन, सहायता काउंटर और स्वयंसेवकों की टीमें चौबीसों घंटे काम करेंगी ताकि भक्तों को किसी भी तरह की असुविधा न हो।
सरयू नदी में स्नान के लिए सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। एनडीआरएफ की टीमें, मेडिकल यूनिट्स और विशेष पुलिस बल तैनात होंगे। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग स्नान घाट और सहायता केंद्र बनाए जा रहे हैं।
राम जन्मभूमि पथ पर शेड और फॉगर्स की व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिल सके। इसके अलावा, हनुमानगढ़ी मार्ग पर पेयजल स्टॉल्स, मैटिंग और शामियाने लगाए जा रहे हैं, जिससे पैदल चलने वाले भक्तों को धूप और गर्म ज़मीन से परेशानी न हो।
पूरी अयोध्या को इस दौरान भव्य रोशनी, फूलों और झंडियों से सजाया जा रहा है। हर गली, हर चौराहे पर श्रीराम के जीवन से जुड़ी झाँकियाँ सजाई जाएंगी। नगर निगम की टीमों को चौबीसों घंटे स्वच्छता बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
यह रामनवमी केवल श्रद्धा का पर्व नहीं होगा, बल्कि यह दर्शाएगा कि कैसे एक प्राचीन नगरी आधुनिकता से कदम मिलाकर चलते हुए परंपरा और तकनीक का सामंजस्य बिठा सकती है। अयोध्या इस वर्ष न केवल धार्मिक, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी दृष्टि से भी एक नई मिसाल कायम करने जा रही है।
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