राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगाया, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के खाली पदों को लेकर उठाया सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी दलित विरोधी मानसिकता ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) को जानबूझकर उपेक्षित किया है। उन्होंने इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि पिछले एक साल से आयोग के दो महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं, जिससे दलितों के अधिकारों की रक्षा में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि यह आयोग एक संवैधानिक निकाय है, और इसे कमजोर करना दलितों के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
राहुल गांधी ने एक ट्वीट के माध्यम से भाजपा सरकार पर हमला करते हुए कहा, “अगर आयोग नहीं है तो दलितों की आवाज कौन सुनेगा? उनकी शिकायतों पर कार्रवाई कौन करेगा?” उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि जल्द से जल्द आयोग के खाली पदों को भरा जाए, ताकि यह संस्था अपने संवैधानिक कर्तव्यों का सही तरीके से पालन कर सके और दलितों के हक की रक्षा कर सके। गांधी ने यह भी कहा कि यह भाजपा सरकार की दलित विरोधी मानसिकता का एक और स्पष्ट उदाहरण है, जो दलितों के लिए जरूरी संस्थाओं की उपेक्षा करती है।
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत एक संवैधानिक संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जातियों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। यह आयोग 2004 में गठित हुआ था और पहले यह संयुक्त रूप से अनुसूचित जातियों और जनजातियों (SC/ST) दोनों के लिए कार्य करता था, लेकिन बाद में इसे अलग कर दिया गया ताकि दोनों वर्गों के मामलों में अधिक पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित की जा सके।
राहुल गांधी ने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए यह सवाल उठाया कि जब आयोग के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां नहीं की जातीं, तो दलितों की समस्याओं का समाधान कैसे संभव होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस संवैधानिक निकाय की उपेक्षा से न केवल दलितों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि इससे देश में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में भी बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
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