April 17, 2026

राहुल गांधी का ‘इंजन तर्क’ बना सियासी ईंधन, कोलंबिया में दिए बयान पर बीजेपी का तंज — “कहना क्या चाह रहे हैं?”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दिए गए ‘बाइक बनाम कार इंजन’ वाले बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इसे “तकनीकी ज्ञान से ज्यादा भ्रम फैलाने वाला” करार दिया है, जबकि कांग्रेस इसे “वैज्ञानिक दृष्टिकोण” बताकर बचाव में उतर आई है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी सुर्खियों में हैं। दक्षिण अमेरिकी देशों के दौरे पर निकले राहुल ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और सत्ता के विकेंद्रीकरण (Decentralization of Power) पर व्याख्यान दिया। इसी दौरान उन्होंने कार और बाइक के इंजन का उदाहरण देते हुए कहा कि “कार बाइक से भारी इसलिए होती है क्योंकि उसका इंजन बड़ा होता है।” राहुल का कहना था कि दुनिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ रही है, जहां इंजन के वजन की जगह बैटरी और दक्षता अहम भूमिका निभाएगी।

राहुल ने अपने बयान में आगे कहा, “जब बाइक का एक्सीडेंट होता है, तो इंजन अलग होकर बाहर चला जाता है और इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाता। लेकिन कार का इंजन अंदर ही रहता है, इसलिए डिजाइन इस तरह की जाती है कि इंजन ड्राइवर को न मारे। असल सवाल यह है कि कार के लिए इतना मेटल और वजन क्यों चाहिए — इसका जवाब है इंजन।” राहुल का यह बयान वहां मौजूद छात्रों को तो तकनीकी दृष्टि से दिलचस्प लगा, लेकिन भारत में यह तेजी से राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।

बीजेपी ने राहुल गांधी के बयान पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैंने एक साथ इतनी बकवास कभी नहीं सुनी। कोई बता दे कि राहुल गांधी आखिर कहना क्या चाह रहे हैं। अगर आप भी मेरी तरह कंफ्यूज और एंटरटेन महसूस कर रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं।” बीजेपी प्रवक्ताओं ने राहुल के इस तर्क को “गैर-वैज्ञानिक” और “बेतुका” बताते हुए उन पर तंज कसे हैं कि वे हर बार विदेश जाकर भारत की राजनीति को “कॉमेडी शो” में बदल देते हैं।

वहीं, कांग्रेस ने राहुल के बचाव में कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की अवधारणा को सरल भाषा में समझाने की कोशिश की थी, लेकिन बीजेपी इसे जानबूझकर गलत अर्थों में पेश कर रही है। कांग्रेस के मुताबिक, “राहुल गांधी का मकसद यह बताना था कि तकनीकी बदलाव सिर्फ मशीनों में नहीं, बल्कि सोच में भी जरूरी है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी के बयान पर मचे इस विवाद ने एक बार फिर यह साबित किया है कि चुनावी माहौल में विपक्षी दलों के हर शब्द पर बीजेपी की नजर रहती है। वहीं राहुल गांधी के समर्थकों का मानना है कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर पेश करना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है। कुल मिलाकर, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में दिया गया यह “इंजन वाला बयान” अब भारतीय राजनीति का नया ‘ईंधन’ बन गया है, जिस पर सत्ता और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी गाड़ियां चला रहे हैं।

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