बच्चों को भी ड्रोन युद्ध में उतारेगा रूस, पुतिन का नया सैन्य प्लान
रूस और यूक्रेन के बीच जारी लंबे युद्ध ने अब नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब बच्चों को भी युद्ध से जोड़ने की योजना बना रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सात साल की उम्र से ही बच्चों को ड्रोन उड़ाने और असेंबल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। फिलहाल रूस के कुछ स्कूलों में इस प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी हो रही है और अगले साल से इसे रेगुलर सिलेबस का हिस्सा बनाने का फैसला किया गया है। नौवीं कक्षा से छात्रों को लड़ाकू ड्रोन बनाने की शिक्षा दी जाएगी, जिनका सीधा इस्तेमाल यूक्रेनी शहरों पर हमलों में किया जाएगा।
इस बीच, यूक्रेन की राजधानी कीव में गुरुवार को हुए एक ड्रोन हमले में 4 बच्चों समेत 23 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, अभी तक रूस की ओर से सीधे बच्चों को युद्ध में नहीं उतारा गया है, लेकिन उन्हें आने वाले समय के लिए तैयार किया जा रहा है। अलाबुगा पॉलिटेक्निक कॉलेज जैसे संस्थानों में छात्रों को यूएवी (मानव रहित हवाई वाहन) की तकनीकी ट्रेनिंग दी जा रही है। इन कॉलेजों से युवाओं को भर्ती कर युद्धक ड्रोन तैयार करने में लगाया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह रूस की दीर्घकालिक युद्ध नीति का हिस्सा है, ताकि आने वाले सालों में ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर तैयार किए जा सकें।
अलाबुगा कॉलेज की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह कॉलेज मॉस्को से करीब 965 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां पढ़ने वाले छात्रों के माता-पिता का आरोप है कि बच्चों के साथ मशीन के पुर्जों जैसा व्यवहार किया जाता है। कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि यहां छात्रों का उत्पीड़न होता है और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। हाल ही में इस कॉलेज से जुड़े 17 वर्षीय डेनिस नाम के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बावजूद कई किशोर इस कॉलेज में दाखिला ले रहे हैं, क्योंकि यहां पढ़ाई के साथ-साथ अच्छा वेतन भी दिया जाता है। रूसी मानकों के हिसाब से यहां मिलने वाला 700 डॉलर से ज्यादा का मासिक वेतन एक बड़ा आकर्षण है।
युद्ध में बच्चों की भागीदारी को लेकर एक चौंकाने वाला बयान भी सामने आया है। एक 13 साल के बच्चे ने कहा कि उसे ड्रोन बनाने में खुशी मिलती है, भले ही इससे लोग मारे जाएं, लेकिन ड्रोन नष्ट न हों। यह बयान इस बात का संकेत है कि बच्चों के दिमाग पर देशभक्ति और युद्ध से जुड़ा गहरा प्रचार असर डाल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुतिन ने बच्चों की भर्ती की न्यूनतम उम्र को 10 साल से घटाकर 7 साल कर दिया है। उनका मानना है कि बच्चों को ड्रोन उड़ाना, असेंबल करना और डिजाइन करना सीखना जरूरी है, क्योंकि यह न सिर्फ देश की सुरक्षा से जुड़ा है बल्कि युवाओं को व्यस्त रखने का भी एक प्रभावी तरीका है।
रूस के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी छोटी उम्र के बच्चों को युद्ध से जोड़ना मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। हालांकि रूस का पक्ष है कि यह पहल बच्चों को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए की जा रही है। लेकिन वास्तविकता यह है कि इस कार्यक्रम के जरिए रूस आने वाले वर्षों में अपने युद्धक संसाधनों को और मजबूत करना चाहता है। यह साफ है कि यूक्रेन के खिलाफ लंबा युद्ध लड़ने की तैयारी में अब मासूम बच्चों को भी एक बड़ा मोहरा बनाया जा रहा है।
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