अमेरिकी-यहूदी समुदाय का बयान: पुतिन के युद्ध के लिए भारत जिम्मेदार नहीं, अमेरिका को संबंध सुधारने की सलाह
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत को जिम्मेदार ठहराने पर अमेरिकी-यहूदी समुदाय ने कड़ा विरोध जताया है। अमेरिकी-यहूदी कमेटी (AJC) ने कहा कि अमेरिका में कुछ अधिकारियों और ट्रंप प्रशासन के सलाहकारों द्वारा लगाए जा रहे आरोप न केवल झूठे हैं बल्कि बेहद घिनौने भी हैं। ट्रंप के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने हाल ही में इस युद्ध को “मोदी का युद्ध” कहा था, जिस पर AJC ने कड़ी आपत्ति जताते हुए भारत का समर्थन किया। कमेटी का कहना है कि भारत अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार है और इस रिश्ते को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
कमेटी ने स्पष्ट किया कि भारत रूस से कच्चा तेल जरूर खरीद रहा है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह पुतिन के युद्ध अपराधों में शामिल है। AJC ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और वैश्विक स्तर पर संतुलन बनाने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में भारत को युद्ध का जिम्मेदार ठहराना न केवल गलत है बल्कि अमेरिका-भारत संबंधों को कमजोर करने की कोशिश भी है। संगठन का मानना है कि अब समय आ गया है जब अमेरिका को भारत के साथ संबंधों को फिर से मज़बूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
दरअसल, यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रूस से बहुत कम मात्रा में तेल आयात करता था। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद भारत का रूसी तेल आयात बढ़कर कुल आयात का 30% से ज्यादा हो गया है। अब भारत रोज़ाना करीब 15 लाख बैरल तेल रूस से खरीद रहा है। ट्रंप के सलाहकार नवारो का आरोप है कि भारत ने इस बढ़ोतरी का इस्तेमाल घरेलू मांग पूरी करने की बजाय भारी मुनाफा कमाने के लिए किया। उनका कहना है कि भारत के इसी रवैये की वजह से वैश्विक बाजार पर दबाव पड़ा है।
हालांकि भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि रूस से तेल खरीदने का मकसद केवल बाजार को स्थिर करना है। भारत का तर्क है कि सस्ती कीमतों पर तेल खरीदकर घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर ऊर्जा संकट को कम किया जा रहा है। इसके बावजूद अमेरिका ने जुलाई 2025 में भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया, जो बाद में पेनाल्टी टैरिफ के तौर पर और बढ़ा दिया गया।
इस टैरिफ पर सवाल उठने पर व्हाइट हाउस सलाहकारों का कहना है कि भारत चाहे तो इस पेनाल्टी से तुरंत छूट पा सकता है। शर्त यह है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे। यानी अगर भारत रूसी तेल से दूरी बना ले तो अमेरिका अगले ही दिन 25% टैरिफ हटा सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में भारत का कहना है कि उसके फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय और वैश्विक हित में हैं। ऐसे में अमेरिकी-यहूदी समुदाय का यह बयान भारत के पक्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देता है और अमेरिका पर अपने रुख पर पुनर्विचार करने का दबाव भी बनाता है।
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