सनातन परंपरा में पति-पत्नी के रिश्ते को बेहद पवित्र माना गया है और इसी से जुड़ा एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि क्या यह बंधन केवल एक जन्म तक सीमित रहता है या फिर कई जन्मों तक साथ निभाता है। इसी गहरे और भावनात्मक प्रश्न का उत्तर प्रेमानंद महाराज ने अपने एक वायरल वीडियो में दिया है, जिसे सुनकर कई भक्तों को आत्मिक शांति मिली है।
वीडियो में एक महिला भक्त प्रेमानंद महाराज से पूछती है कि क्या संभव है कि उसे सातों जन्मों में एक ही पति मिले। इस पर महाराज बताते हैं कि सामान्य रूप से ऐसा होना आवश्यक नहीं है, क्योंकि हर जन्म में जीव के कर्म, संचित कर्म और प्रारब्ध बदल जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पति-पत्नी का साथ मिलना केवल भावनाओं पर नहीं, बल्कि कर्म के सूक्ष्म विधान पर आधारित होता है।
प्रेमानंद महाराज आगे समझाते हैं कि यह भी जरूरी नहीं कि जो व्यक्ति इस जन्म में पति या पत्नी है, वही अगले जन्म में भी उसी रूप में मिले या मनुष्य योनि में ही जन्म ले। कर्म का फल कभी-कभी जीव को अलग-अलग योनियों में भी ले जा सकता है। इसलिए केवल प्रेम या लगाव के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि अगले जन्मों में भी वही संबंध बना रहेगा।
हालांकि महाराज यह भी कहते हैं कि भगवान की कृपा से असंभव लगने वाली बातें भी संभव हो सकती हैं। यदि कोई स्त्री या पुरुष भगवान की अनन्य भक्ति करे और पूरे समर्पण के साथ उनसे यह वरदान मांगे कि वही जीवनसाथी अगले कई जन्मों तक साथ रहे, तो ईश्वर चाहें तो ऐसा विधान रच सकते हैं। सृष्टि के रचयिता के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।
अपनी बात को और गहराई देने के लिए प्रेमानंद महाराज एक मार्मिक कथा का उदाहरण देते हैं, जिसमें भक्ति के बल पर एक राजकुमारी अपने पूर्व जन्म के पति को हाथी की योनि से मुक्ति दिलाती है। इस कथा के माध्यम से वे बताते हैं कि केवल कर्म नहीं, बल्कि भजन, तप और भगवान की आराधना ही जीवन और संबंधों की दिशा तय करती है। उनका संदेश साफ है कि जब भक्ति जीवन का केंद्र बन जाती है, तभी ईश्वर विशेष कृपा करते हैं।
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