अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त और गहरी नींद बेहद जरूरी मानी जाती है, लेकिन अगर रात में आपकी नींद बार-बार टूटती है तो इसे हल्के में लेने की भूल न करें। हाल ही में नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, बार-बार नींद में खलल पड़ना दिल की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ऐसी समस्या रहने पर हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
रिसर्च में बताया गया है कि जब नींद पूरी नहीं हो पाती या बार-बार टूटती है, तो शरीर को खुद को रिपेयर करने का पूरा मौका नहीं मिलता। इसका सीधा असर हार्ट की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। नींद के दौरान दिल को आराम मिलता है और ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर पर रहता है, लेकिन बार-बार जागने से दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जो लोग रात में दो से तीन बार या उससे ज्यादा बार जागते हैं, उनमें हार्ट डिजीज का खतरा करीब 30 फीसदी तक बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार नींद टूटने का एक बड़ा कारण मानसिक तनाव भी हो सकता है। राजीव गांधी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि अगर दिमाग सोने के बाद भी ज्यादा सक्रिय रहता है, तो यह तनाव और ओवरथिंकिंग का संकेत हो सकता है। मानसिक तनाव का सीधा संबंध हार्ट अटैक और अन्य दिल की बीमारियों से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
कुछ लोगों को इस समस्या से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है, जैसे स्लीप एपनिया से पीड़ित लोग, लगातार तनाव में रहने वाले व्यक्ति, या फिर रात में देर तक मोबाइल और टीवी देखने की आदत रखने वाले लोग। ऐसे मामलों में नींद का पैटर्न और ज्यादा बिगड़ सकता है, जिससे दिल पर नकारात्मक असर पड़ता है।
इस खतरे से बचने के लिए विशेषज्ञ सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाने, रोज एक तय समय पर सोने-जागने की आदत डालने और रात में चाय-कॉफी से परहेज करने की सलाह देते हैं। इसके साथ ही योग, मेडिटेशन और तनाव कम करने वाली गतिविधियों को अपनाकर नींद की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है। अगर समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है।
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