प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 से 18 दिसंबर तक जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान के बहु-देशीय दौरे पर रवाना होंगे। यह दौरा भारत की कूटनीतिक सक्रियता और पश्चिम एशिया-अफ्रीका क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग सहित कई प्रमुख मुद्दों को लेकर उच्च-स्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री की बैठकें द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेंगी।
यात्रा का पहला चरण जॉर्डन में रहेगा, जहाँ प्रधानमंत्री द्विपक्षीय वार्ता के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर विशेष चर्चा करेंगे। भारत और जॉर्डन के बीच रक्षा, सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में गहरी साझेदारी रही है, जिसे और व्यापक रूप देने पर बातचीत होगी। इसके अलावा, प्रवासी भारतीय समुदाय से मुलाकात भी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें वे क्षेत्र में भारतीयों की भूमिका और योगदान की सराहना करेंगे। जॉर्डन के नेतृत्व के साथ प्रधानमंत्री की यह बैठक पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
दूसरे पड़ाव इथियोपिया में प्रधानमंत्री अफ्रीका की सबसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बातचीत करेंगे। इथियोपिया भारत का विश्वसनीय साझेदार रहा है, विशेष रूप से कृषि, फार्मास्यूटिकल, आईटी और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई विकास परियोजनाओं, निवेश और तकनीकी सहयोग पर समझौते होने की संभावना है। अफ्रीकी महाद्वीप में भारत की उपस्थिति बढ़ाने की रणनीति के तहत यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत विशेष रूप से अफ्रीकी देशों के साथ दक्षिण-दक्षिण सहयोग को मजबूत करना चाहता है, जिसे मोदी की यह यात्रा आगे बढ़ाएगी।
यात्रा का अंतिम चरण ओमान में होगा, जहाँ प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के बड़े समूह को संबोधित करेंगे और ओमान के नेतृत्व के साथ रक्षा सहयोग, सामुद्रिक सुरक्षा, ऊर्जा व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों पर अहम बैठकें करेंगे। ओमान भारत का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी है, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा के संदर्भ में। दोनों देशों के बीच कई आर्थिक और सैन्य समझौते पहले से मौजूद हैं, जिन्हें इस दौरे में और विस्तारित करने पर जोर दिया जाएगा। ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में भी नए निवेश अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
पूरे दौरे के दौरान भारत का मुख्य लक्ष्य तीनों देशों के साथ अपने राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक संबंधों को मजबूत करना रहेगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग, वैश्विक चुनौतियों पर तालमेल और व्यापारिक साझेदारी को बढ़ाने की दिशा में यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सरकारी सूत्रों का मानना है कि यह दौरा न केवल भारत की विदेश नीति को गति देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सक्रिय और प्रभावी भूमिका को और मजबूत करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
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