पहलगाम हमले पर चिदंबरम के बयान से मचा बवाल, कांग्रेस और सहयोगी दलों ने बनाई दूरी
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान ने नया राजनीतिक भूचाल ला दिया है। चिदंबरम ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह मानने का क्या आधार है कि आतंकी पाकिस्तान से आए थे? उनके इस बयान ने केंद्र सरकार के साथ-साथ खुद कांग्रेस पार्टी को भी असहज कर दिया है।
चिदंबरम ने आरोप लगाया कि सरकार ने हमले को लेकर अब तक कोई पुख्ता जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। उन्होंने एनआईए की जांच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी ने न तो आतंकियों की पहचान बताई और न ही यह स्पष्ट किया कि वे कहां से आए थे। चिदंबरम का कहना था कि हो सकता है कि हमलावर स्थानीय आतंकी हों, ऐसे में यह मान लेना कि वे पाकिस्तान से आए थे, गलत हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर में हुए नुकसान को सरकार छिपा रही है।
कांग्रेस के भीतर भी इस बयान को लेकर मतभेद उभर आए हैं। पार्टी सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि बीजेपी चिदंबरम के बयान को असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस हमेशा पाकिस्तान द्वारा भारत में आतंकवाद को समर्थन देने का विरोध करती रही है और सेना के साथ खड़ी है। पार्टी के रुख से साफ है कि वह चिदंबरम के बयान से दूरी बनाना चाहती है।
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चिदंबरम को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों का दशकों से सामना करना पड़ा है, और किसी सबूत की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने टीआरएफ (The Resistance Front) के पहले जिम्मेदारी लेने और फिर मुकर जाने का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तान खुद संयुक्त राष्ट्र में ऐसे संगठनों के लिए पैरवी करता है।
विवाद बढ़ने के बाद पी. चिदंबरम ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर सफाई दी। उन्होंने लिखा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उनका आरोप था कि इंटरव्यू का पूरा वीडियो छुपा दिया गया और केवल कुछ चुनिंदा वाक्य वायरल किए गए, जिससे लोगों को गुमराह किया जा रहा है। चिदंबरम ने खुद को “ट्रोल्स” का शिकार बताया और कहा कि उनका मकसद सिर्फ सच्चाई पूछना था, किसी का बचाव करना नहीं।
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