April 21, 2026

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान, एलजेपी की बढ़ी मांग

बिहार विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना है, लेकिन उससे पहले सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी एलजेपी (आरवी) 40 सीटों की मांग पर अड़ी हुई है। वहीं सूत्रों के अनुसार जेडीयू और बीजेपी उन्हें 20 सीटों से ज्यादा देने के पक्ष में नहीं दिख रही हैं। इस बीच गठबंधन के अंदर अन्य सहयोगी दलों जैसे जीतन राम मांझी की हम (से) और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम को लेकर भी समीकरण साधने की कोशिश चल रही है।

एलजेपी का बिहार चुनावों में प्रदर्शन हमेशा चर्चा में रहा है। साल 2000 में रामविलास पासवान ने पार्टी का गठन किया और फरवरी 2005 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा। कांग्रेस के साथ गठबंधन में उतरी एलजेपी ने 178 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए और 29 पर जीत दर्ज की। उस समय पार्टी का वोट शेयर 12.62% रहा। हालांकि किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला और राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। कुछ महीनों बाद दोबारा चुनाव हुए, लेकिन तब एलजेपी का प्रदर्शन गिरा और 203 सीटों में से सिर्फ 10 पर जीत सकी।

इसके बाद पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे जाता रहा। 2010 में आरजेडी के साथ मिलकर 75 सीटों पर लड़ी लेकिन केवल 3 सीटें मिलीं। वोट शेयर घटकर 6.74% पर आ गया। 2015 के चुनाव में एनडीए के साथ रहते हुए एलजेपी ने 42 सीटों पर मुकाबला किया लेकिन महज 2 सीटें ही जीत पाई। वोट प्रतिशत भी घटकर 4.83% तक पहुंच गया। 2020 में चिराग पासवान ने गठबंधन से अलग होकर 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन पार्टी केवल 1 सीट पर जीत दर्ज कर पाई। हालांकि इस बार वोट प्रतिशत थोड़ा बढ़कर 5.66% रहा।

चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि 2020 में चिराग पासवान के अलग लड़ने से जेडीयू को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। करीब 64 सीटों पर एलजेपी उम्मीदवारों ने इतने वोट हासिल किए, जो जीत-हार के अंतर से ज्यादा थे। इस कारण जेडीयू का स्ट्राइक रेट गिर गया और बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया। यही कारण है कि इस बार भी एलजेपी खुद को एक निर्णायक खिलाड़ी साबित करने की कोशिश कर रही है।

एलजेपी का दावा है कि उसने 2024 के लोकसभा चुनाव में 6% से ज्यादा वोट हासिल किए हैं, जो यह दर्शाता है कि पार्टी का जनाधार धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसी आधार पर चिराग पासवान 40 सीटों की मांग कर रहे हैं। हालांकि गठबंधन के भीतर हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सीट बंटवारे का फार्मूला तय करना आसान नहीं होगा और आने वाले हफ्तों में राजनीतिक खींचतान और तेज हो सकती है।

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