April 17, 2026

“सरकार ब्राह्मण विरोधी” शोभायात्रा रोकने पर बोले राष्ट्रीय अध्यक्ष!

लखनऊ में परशुराम जयंती के मौके पर एक शोभा यात्रा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। जब शोभा यात्रा के आयोजकों ने प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद इसे निकालने की कोशिश की, तो पुलिस ने हस्तक्षेप कर इसे रोक दिया। यह यात्रा जो कई हफ्तों से योजना बनाई जा रही थी, को लेकर शहर में कई तरह की चर्चाएँ हैं।

शोभा यात्रा की तैयारियाँ और विवाद की शुरुआत

परशुराम जयंती के अवसर पर मुंशी पुलिया से दारुल सपा तक एक भव्य शोभा यात्रा निकालने की योजना बनाई गई थी। इस यात्रा के आयोजन के लिए अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के सदस्य कई हफ्तों से तैयारियाँ कर रहे थे, जिसमें बैनर, होल्डिंग्स और प्रमुख नेताओं के नाम शामिल थे। यात्रा में प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक, मंत्री दयाशंकर सिंह, पूर्व डीजीपी विजय कुमार, और पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह भी अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे। लेकिन प्रशासन से परमिशन नहीं मिलने पर यात्रा को लेकर विवाद शुरू हो गया।

प्रशासन का फैसला और ब्राह्मण महासभा का विरोध

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि यह कदम सरकार की ब्राह्मण विरोधी नीति का हिस्सा है। उनका कहना था कि परशुराम की शोभायात्रा के आयोजन में कई महत्वपूर्ण लोग शामिल होने वाले थे, लेकिन प्रशासन ने सिर्फ इसलिए अनुमति नहीं दी क्योंकि यह यात्रा ब्राह्मण समाज के नेतृत्व में थी। उनका आरोप था कि सरकार सिर्फ दिखावे के लिए काम कर रही है और ब्राह्मणों की धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है।

 

इंदिरा नगर एसीपी की प्रतिक्रिया और विवाद का बढ़ना

इंदिरा नगर एसीपी अंजनेय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यह शोभायात्रा परंपरागत नहीं थी, और इस वजह से यात्रा को अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद, एक घंटे तक राजेंद्र नाथ त्रिपाठी और एसीपी के बीच चर्चा हुई, लेकिन इसके बावजूद महासभा के सदस्य यात्रा निकालने पर अड़े रहे। पुलिस और ब्राह्मण महासभा के बीच हलचल बढ़ गई और जबरन यात्रा निकालने का प्रयास किया गया।

पुलिस का हस्तक्षेप और जबरन यात्रा का आयोजन

जब प्रशासन ने यात्रा को रोकने की कोशिश की, तो पुलिस ने ताकत का इस्तेमाल किया। इसके बाद ब्राह्मण महासभा के सदस्य शोभायात्रा को जबरन निकालने पर अड़े रहे, जिससे पुलिस और महासभा के बीच नोकझोंक हो गई। एक हफ्ते पहले ही महासभा ने यात्रा के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी थी, लेकिन उसे किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।

 

महासभा के अध्यक्ष का आरोप

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने यात्रा को जानबूझकर रोका है। उनका कहना था कि ब्राह्मण समाज के नेतृत्व में निकाली जा रही इस यात्रा में 80% ब्राह्मण और 20% अन्य लोग शामिल थे, जिन्हें परशुराम के अनुयायी माना जाता है। इस यात्रा का नेतृत्व ब्राह्मण समाज कर रहा था, और यह सरकार इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।

 

क्या था प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य?

प्रशासन का कहना है कि यह यात्रा किसी परंपरा का हिस्सा नहीं थी, और सुरक्षा कारणों से इसे अनुमति नहीं दी गई। इंदिरा नगर एसीपी ने कहा कि परंपरागत शोभायात्राओं के लिए अलग से अनुमति दी जाती है, लेकिन इस यात्रा को लेकर प्रशासन का मानना था कि यह किसी नई परंपरा का हिस्सा नहीं थी, इस कारण इसे रोकना जरूरी था।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने लखनऊ में एक नए विवाद को जन्म दिया है। क्या प्रशासन का कदम सही था या फिर यह किसी विशेष समुदाय को टारगेट करने की कोशिश थी? यह सवाल अभी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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