पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार रात पाकिस्तान ने काबुल पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इसी बीच पाकिस्तान ने अपने देश में रह रहे अफगानी शरणार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान और ईरान से 700 से ज्यादा अफगानी परिवारों को जबरन बाहर निकाला गया है। इस कदम के बाद हजारों शरणार्थियों के सामने विस्थापन का संकट गहराता जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के उप प्रवक्ता फरामर्ज़ बर्ज़िन ने जानकारी दी कि 1 सितंबर से 4 अक्टूबर 2025 तक 1 लाख 71 हजार से ज्यादा अफगानी नागरिक पाकिस्तान से अपने देश लौट चुके हैं। बर्ज़िन ने बताया कि पाकिस्तान लगातार अफगान नागरिकों को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है। पाकिस्तान सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि बिना वैध दस्तावेज वाले विदेशी नागरिकों को देश में अब जगह नहीं दी जाएगी।
अफगान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान में रह रहे शरणार्थियों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस उत्पीड़न, हिरासत में लिए जाने और जबरन निर्वासन जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। सिंध और पंजाब प्रांतों में हजारों अफगान प्रवासियों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के उनके घरों से निकाला जा रहा है। एक अफगानी प्रवासी मलिक अव्वल मियाखेल ने कहा कि “हमसे पहचान पत्र मांगे जा रहे हैं, पुलिस परेशान कर रही है, और हमें डर के माहौल में रहना पड़ रहा है।”
जेनेवा में हुई यूएनएचसीआर की बैठक के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान शरणार्थियों की सुरक्षित वापसी में सहयोग करने की अपील की थी। इसके बावजूद, पाकिस्तान सरकार ने 2023 की शुरुआत में ही अफगान सिटीजन कार्ड (ACC) और प्रूफ ऑफ रजिस्ट्रेशन (PoR) कार्ड रद्द कर दिए थे। इस निर्णय के बाद लाखों अफगान शरणार्थी अब देश में “अवैध प्रवासी” घोषित हो चुके हैं।
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान आतंकियों को पनाह दे रहा है। हाल ही में ऑरकजई जिले में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमले में पाकिस्तानी सेना के 11 जवान मारे गए थे। इसके बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सख्त लहजे में कहा था कि “जो भी आतंकियों को शरण देगा, चाहे वो पाकिस्तान में हो या अफगानिस्तान में, उसे नतीजे भुगतने होंगे।”
हालांकि, अफगानिस्तान ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई है। काबुल ने इस्लामाबाद को चेतावनी दी है कि अगर ऐसे हमले दोबारा हुए तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि दोनों देशों के बीच दुश्मनी अब शब्दों से आगे बढ़कर खुली कार्रवाई के दौर में पहुंच गई है, जिससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है।
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