April 25, 2026

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर अमेरिका की प्रतिक्रिया—“हम युद्ध में शामिल नहीं होंगे, लेकिन परमाणु टकराव को रोकने की कोशिश करेंगे”

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह इस क्षेत्रीय विवाद में सैन्य रूप से शामिल नहीं होगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस ने गुरुवार को एक टेलीविज़न साक्षात्कार में कहा कि यह संघर्ष मूल रूप से अमेरिका से जुड़ा मामला नहीं है, इसलिए अमेरिका इसमें प्रत्यक्ष भागीदारी से दूर रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका की प्राथमिक चिंता यही है कि यह विवाद परमाणु शक्तियों के बीच किसी बड़े संघर्ष या परमाणु युद्ध में न बदल जाए।

वेंस ने कहा, “देखिए, हम इस बात को लेकर निश्चित रूप से चिंतित हैं कि कहीं दो परमाणु संपन्न देश आपस में टकरा न जाएं और किसी बड़े युद्ध की स्थिति उत्पन्न न हो। लेकिन अमेरिका भारत और पाकिस्तान को नियंत्रित नहीं कर सकता। हम केवल उन्हें तनाव कम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।” उन्होंने बताया कि वाशिंगटन की नीति स्पष्ट है—तनाव को जल्द से जल्द कम करना, ताकि यह टकराव किसी गंभीर परिणाम में न बदल जाए।

साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया कि ट्रंप प्रशासन भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को लेकर कितनी चिंता में है, तो उन्होंने दोहराया कि अमेरिका की चिंता वास्तविक है और इस स्थिति को बहुत गंभीरता से लिया जा रहा है। वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो दोनों इस विषय को प्राथमिकता दे रहे हैं और उनका मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है, लेकिन अमेरिका इसका नेतृत्व कूटनीतिक स्तर पर ही करेगा।

उपराष्ट्रपति ने कहा, “हम युद्ध के बीच में शामिल नहीं होने जा रहे हैं। यह हमारा प्रत्यक्ष युद्ध नहीं है। भारत को पाकिस्तान से शिकायत है और पाकिस्तान ने उस पर प्रतिक्रिया दी है। हम केवल यह प्रयास कर सकते हैं कि दोनों देशों को कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत की ओर प्रेरित करें, ताकि यह स्थिति और न बिगड़े।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी पक्ष को हथियार डालने का निर्देश नहीं दे सकता—न भारत को और न ही पाकिस्तान को। “हम केवल यह उम्मीद कर सकते हैं कि संयम बरतते हुए दोनों देश इस संकट को बढ़ने से रोकेंगे,” वेंस ने कहा।

उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका इस मामले को कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से ही सुलझाने की दिशा में काम कर रहा है। “हम लगातार अपने राजनयिक संपर्क बनाए हुए हैं और दोनों देशों से बातचीत कर रहे हैं। हमारी आशा और अपेक्षा यही है कि यह तनाव किसी व्यापक क्षेत्रीय युद्ध या, भगवान न करे, किसी परमाणु संघर्ष में न बदले,” वेंस ने कहा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर सैन्य गतिविधियों में तेजी और बयानबाज़ी में तल्खी देखी जा रही है। दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है और वैश्विक समुदाय की निगाहें इस संवेदनशील परिस्थिति पर टिकी हुई हैं। अमेरिका का यह रुख स्पष्ट करता है कि वह इस क्षेत्रीय संघर्ष को दूर से देख रहा है लेकिन उसकी सक्रियता कूटनीतिक दबाव और बातचीत के जरिए समाधान खोजने तक सीमित है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के दृष्टिकोण से एक संतुलित और व्यावहारिक रुख माना जा रहा है, जिसमें प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से बचते हुए संघर्ष की भयावहता को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। भारत और पाकिस्तान जैसे दो परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी देशों के बीच जारी यह तनाव न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंताओं को जन्म दे रहा है। अमेरिका की यह कूटनीतिक पहल आने वाले समय में इस स्थिति को शांत करने में कितनी कारगर होगी, यह देखना अभी बाकी है।

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