पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुरीदके इलाके में रविवार को तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के बीच भीषण झड़पें हुईं. बताया जा रहा है कि कट्टरपंथी संगठन TLP के सैकड़ों समर्थक गाज़ा के समर्थन में इस्लामाबाद की ओर मार्च कर रहे थे और अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन करना चाहते थे. मुरीदके को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद का गढ़ माना जाता है, जहां उसका मदरसा और ठिकाना स्थित है.
जैसे ही TLP का काफिला मुरीदके पहुंचा, पुलिस और रेंजर्स ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद हालात तेजी से बिगड़ गए. सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और फायरिंग का इस्तेमाल किया. जवाब में प्रदर्शनकारियों ने भी पत्थरबाजी शुरू कर दी और कई सरकारी वाहनों व बसों को आग के हवाले कर दिया. इस झड़प में कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए.
हिंसा के बाद प्रशासन ने इस्लामाबाद और लाहौर के बीच के कई रास्ते बंद कर दिए हैं. राजधानी में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और इंटरनेट सेवाएं बंद करने पर विचार किया जा रहा है. बताया जा रहा है कि तीन दिन से इस्लामाबाद और लाहौर का आम जनजीवन ठप है. वहीं, तहरीक-ए-लब्बैक का आरोप है कि सरकार ने गाज़ा समर्थन मार्च की अनुमति दी थी, लेकिन फज्र की नमाज के दौरान अचानक पुलिस ने हमला कर दिया.
तहरीक-ए-लब्बैक की स्थापना वर्ष 2015 में मौलाना खादिम हुसैन रिजवी ने की थी. यह संगठन पाकिस्तान की सबसे प्रभावशाली कट्टरपंथी सुन्नी पार्टियों में गिना जाता है. 2023 में इस संगठन ने इमरान खान की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में बड़ी भूमिका निभाई थी. मौजूदा समय में इस्लामाबाद, लाहौर और कराची समेत कई शहरों में इस संगठन के प्रदर्शन से तनाव का माहौल है, और हालात पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों को अतिरिक्त तैनाती करनी पड़ी है.
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