May 1, 2026

कराची में कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान ने मानी अपनी गलती, कहा– विज्ञान और रिसर्च को नजरअंदाज करने से देश पिछड़ा

पाकिस्तान अब खुद मान रहा है कि वह विकास और अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विज्ञान और रिसर्च के क्षेत्र में भी काफी पीछे रह गया है. कराची में आयोजित एक कार्यक्रम में देश के बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों ने कहा कि पाकिस्तान ने लंबे समय से वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान को बढ़ावा नहीं दिया, जिसकी वजह से देश वैश्विक स्तर पर पिछड़ गया. उनका मानना है कि सिर्फ वैज्ञानिक ज्ञान और रिसर्च के जरिए ही कोई देश प्रगति कर सकता है.

यह बात कराची स्थित पाकिस्तान आर्ट्स काउंसिल में आयोजित एक कार्यक्रम में कही गई, जहां लेखक और मेडिकल डॉक्टर सिकंदर मुगल की सिंधी भाषा में लिखी दो किताबों — ज़हानत जी इर्तिका और इर्तिका: ज़िंदगी अइन साइंस जो सफर — का विमोचन किया गया. कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को आसान भाषा में समझाना जरूरी है, ताकि आम लोग और छात्र उनमें रुचि लें. मुगल ने कहा कि विकसित देशों ने विज्ञान को प्राथमिकता दी, जबकि पाकिस्तान में इस विषय को हमेशा पीछे रखा गया.

ज़ाबिस्ट यूनिवर्सिटी के डीन रियाज़ शेख ने भी माना कि पाकिस्तान में वर्षों से विज्ञान-विरोधी माहौल को बढ़ावा दिया गया है, कई बार राज्य के सहयोग से भी. उन्होंने बताया कि एक बार जब उन्होंने स्कूल पाठ्यक्रम में डार्विन का सिद्धांत जोड़ा था, तो जनता के विरोध के कारण उसे हटाना पड़ा. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है जब वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान के लिए खुला वातावरण तैयार किया जाए.

मेडिकल विशेषज्ञों और प्रोफेसरों ने कहा कि सिकंदर मुगल की किताबें नई पीढ़ी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में प्रेरित करेंगी. उन्होंने बताया कि इन पुस्तकों में मानव बुद्धि के विकास से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों तक पर गहराई से चर्चा की गई है. कार्यक्रम का निष्कर्ष यही रहा कि पाकिस्तान को अगर वाकई तरक्की करनी है तो उसे शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान में निवेश बढ़ाना होगा — क्योंकि यही असली प्रगति की कुंजी है.

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