पैरों में जलन और दर्द: न करें नज़रअंदाज़, गंभीर बीमारियों का हो सकता है संकेत
अक्सर लोग पैरों में जलन या दर्द को सामान्य थकान या कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बनी रहने वाली यह समस्या कई बार गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकती है। पहले यह समस्या ज्यादातर बुजुर्गों में देखने को मिलती थी, मगर अब 40 से 50 साल की उम्र के लोगों और युवाओं में भी यह तेजी से बढ़ रही है।
पैरों में जलन और दर्द के कई कारण हो सकते हैं। विटामिन्स की कमी, चोट, एथलीट फुट जैसी समस्या तो इसका कारण बन ही सकती है, साथ ही यह डायबिटीज जैसी बीमारी का भी लक्षण हो सकता है। सफदरजंग अस्पताल के कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि अगर डायबिटीज लंबे समय तक कंट्रोल में न रहे तो इसका असर नसों पर पड़ता है। ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने से नसों में सूजन आने लगती है और धीरे-धीरे नर्व डैमेज हो जाती है। इस स्थिति को न्यूरोपैथी कहा जाता है, जिसमें पैरों में जलन, झनझनाहट, सुन्नपन और दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
डॉ. किशोर के अनुसार, पैरों की छोटी नसें सबसे पहले प्रभावित होती हैं। यदि समय रहते डायबिटीज को नियंत्रित न किया जाए तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है, जिससे पैरों में घाव, संक्रमण और अल्सर बनने का खतरा भी होता है। इसके अलावा विटामिन C और B12 की कमी से नसें कमजोर हो जाती हैं, जिससे पैरों में सुन्नपन और झनझनाहट बढ़ जाती है। वहीं, ब्लड क्लॉटिंग और रक्त प्रवाह बाधित होने से भी नसों में सूजन और तेज दर्द हो सकता है।
कई बार पैरों का दर्द साइटिका के कारण भी होता है। इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी से निकलने वाली नसों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे पैरों तक नसों में खिंचाव और जलन महसूस होती है। इसके अलावा फंगल इन्फेक्शन, एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं भी पैरों में जलन का कारण बन सकती हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इस समस्या से बचाव के लिए नियमित जांच करानी चाहिए। डायबिटीज से ग्रसित लोग ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखें। संतुलित आहार लें, जिसमें विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में हों। आरामदायक जूते और कॉटन के मोज़े पहनें। हल्का व्यायाम करके रक्त संचार को सामान्य बनाए रखना जरूरी है। साथ ही धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना भी नसों के स्वास्थ्य के लिए बेहद अहम है।
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