‘ऑपरेशन सिंदूर’ से हिल गया पाकिस्तान का स्टॉक मार्केट, लेकिन भारतीय बाजार में दिखा भरोसे का उत्साह
पाकिस्तान के शेयर बाजार में अचानक आई भारी गिरावट ने सभी को चौंका दिया है। लेकिन जब इसकी परतें खुलीं, तो इसके पीछे की वजह और भी ज्यादा सनसनीखेज निकली—भारतीय सेना का जवाबी हमला ‘ऑपरेशन सिंदूर’। पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 टूरिस्टों की मौत के बाद जो हालात बने, उन्होंने सिर्फ कश्मीर की वादियों को ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के बाजारों को भी झकझोर कर रख दिया।
पाकिस्तान स्टॉक मार्केट का बुरा हाल
कश्मीर के पहलगाम में टूरिस्टों पर हुए हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठनों पर आते ही भारत ने बड़ा कदम उठाया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने आतंकियों के खिलाफ सीमापार कार्रवाई की, जिसका असर सबसे पहले पाकिस्तान के शेयर बाजार पर पड़ा। 23 अप्रैल के बाद से अब तक कराची स्टॉक एक्सचेंज (KSE-100) में करीब 9,930 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है।
24 अप्रैल को ऑपरेशन की खबर आने के बाद जैसे ही कराची स्टॉक एक्सचेंज का कारोबार खुला, महज कुछ मिनटों के भीतर बेंचमार्क इंडेक्स 2,485 अंक गिर गया। अगले ही दिन इसमें और गिरावट देखी गई और शुरुआती कारोबार में ही KSE-100 इंडेक्स 6,272 अंक गिरकर 107,296.64 पर आ गया। जबकि एक दिन पहले यह 113,568.51 पर बंद हुआ था। कुल मिलाकर इंडेक्स करीब 6 प्रतिशत तक धड़ाम हो गया, जिससे निवेशकों में भारी दहशत फैल गई।
भारत का सधा हुआ रुख, शेयर बाजार ने किया सलाम
जहां पाकिस्तान का बाजार बुरी तरह टूटा, वहीं भारत के बाजार ने मजबूत पकड़ दिखाई। बुधवार सुबह बाजार रेड जोन में खुला, लेकिन कुछ ही देर में उसने रिकवरी कर ली। जानकारों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक परिपक्व और संतुलित जवाबी कार्रवाई थी, जो उकसावे की बजाय आतंक पर फोकस्ड थी।
विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत पर बरकरार
जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजिस्ट डॉक्टर विजय कुमार के अनुसार, भारत के बाजार पर विदेशी निवेशकों का भरोसा कायम है। बीते 14 कारोबारी सत्रों में 43,940 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश भारतीय इक्विटी में आया है। भारत की स्थिर अर्थव्यवस्था, मजबूत करेंसी, और अमेरिका-चीन जैसे बड़े देशों की सुस्त आर्थिक चाल भारत के पक्ष में काम कर रही है।
भूराजनीतिक फैसलों का भी असर
भारत ने केवल सैन्य स्तर पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि कूटनीतिक रूप से भी पाकिस्तान पर दबाव बनाया। सार्क वीजा छूट को खत्म करना, पाकिस्तानी राजनयिकों की संख्या सीमित करना और सिंधु जल समझौते की समीक्षा जैसे बड़े कदमों ने यह साफ कर दिया कि भारत अब किसी भी आतंकी हरकत को हल्के में नहीं लेगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक परिपक्वता का परिचायक बना है। जहां पाकिस्तान का बाजार अपनी जमीनी अस्थिरता और आतंक को संरक्षण देने की नीति का खामियाजा भुगत रहा है, वहीं भारत अपने संतुलित दृष्टिकोण और वैश्विक निवेशकों के भरोसे के दम पर आर्थिक रूप से और भी मज़बूत होकर उभरा है।
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