बिहार की राजनीति में आज ऐतिहासिक दिन रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथग्रहण समारोह में मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जो लगातार दूसरी बार इस पद पर बने हैं।
नई कैबिनेट में कुल 26 मंत्रियों को शामिल किया गया है। इस कैबिनेट में तीन महिला चेहरे जगह पाए हैं और मुस्लिम समुदाय से जमा खान को मंत्री बनाया गया है। महिला मंत्रियों में लेशी सिंह, रामा निषाद और पहली बार मंत्री बनीं श्रेयसी सिंह शामिल हैं, जो पूर्व निशानेबाज और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं। सरकार की टीम में कई वरिष्ठ नेताओं के साथ नए चेहरों का मिश्रण दिखाई देता है।
कई राजनीतिक परिवारों के सदस्यों को भी इस सरकार में स्थान मिला है। जीतन राम मांझी के बेटे संतोष सुमन को फिर से मंत्री बनाया गया, जबकि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश पहली बार मंत्री बने हैं। पिछली सरकार में मंत्री रहे संतोष सुमन के अनुभव को फिर से तरजीह दी गई है।
नीतीश कैबिनेट की सूची में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा के अलावा विजय चौधरी, विजेंद्र यादव, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, नितिन नवीन, मदन साहनी, सुरेंद्र मेहता, प्रमोद कुमार, संजय टाइगर, संजय कुमार, अरुण शंकर प्रसाद, जमा खान, राम कृपाल, रामा निषाद, लखेंद्र रौशन, सुनील कुमार और श्रेयसी सिंह जैसे नाम शामिल हैं। यह सूची क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इस नई सरकार में जेडीयू ने एक बार फिर अपने पुराने और अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने संगठन और जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए नए मंत्रियों को शामिल किया है। प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल भी मंत्री बनाए गए हैं। समग्र रूप से यह कैबिनेट जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की संयुक्त ताकत और रणनीतिक सामाजिक संतुलन को दर्शाती है।
बिहार में नई सरकार के गठन के साथ नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर का नया अध्याय शुरू हो गया है, और अब सबकी नजरें इस कार्यकाल में उनकी नीतियों व निर्णयों पर टिकी हैं।
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