दीपावली पर पावन सनातन धाम में भव्य आध्यात्मिक संगोष्ठी: सपना गोयल बोलीं-अंतर्मन के अंधकार को दूर करने का पर्व है दीपावली

लखनऊ। सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुआई में दीपावली के पावन अवसर पर बुधवार, 04 नवम्बर 2026 को मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। चिनहट स्थित वी-मार्ट के पास रजत डिग्री कॉलेज के सामने पावन सनातन धाम लॉन परिसर में आयोजित इस विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बहनों ने सहभागिता की। इस अवसर पर आध्यात्मिक जागृति, धार्मिक चेतना और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से बहनों को दीपावली की भेंट भी वृहद स्तर पर वितरित की गई। पूरे आयोजन में दीपावली के आध्यात्मिक महत्व, आत्मशुद्धि, सकारात्मक चिंतन और जीवन में सदाचार अपनाने का संदेश प्रमुखता से दिया गया।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल ने कहा कि दीपावली केवल घरों को रोशन करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर आत्मा के प्रकाश को जागृत करने का पावन अवसर है। जिस प्रकार हम दीपावली पर अपने घर के कोने-कोने से धूल और गंदगी हटाकर स्वच्छता लाते हैं, उसी प्रकार हमें अपने मन से ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार, क्रोध, लोभ और नकारात्मक विचारों को भी दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बाहरी स्वच्छता हमारे परिवेश को सुंदर बनाती है, जबकि मन की स्वच्छता हमारे व्यक्तित्व और जीवन को प्रकाशमय करती है। जब अंतर्मन निर्मल होता है, तभी आत्मा का वास्तविक प्रकाश प्रकट होता है, जो ज्ञान, विवेक और सदाचार का प्रतीक है।

उन्होंने भारतीय ऋषि-मुनियों की आध्यात्मिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य का अंतःकरण ही उसका वास्तविक मंदिर है। उपनिषदों में व्यक्त प्रार्थना ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो, केवल एक आध्यात्मिक उद्घोष नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन-दर्शन है। कार्तिक मास की अमावस्या भी हमें यही प्रेरणा देती है कि सकारात्मक प्रयास का एक छोटा-सा दीपक भी निराशा के घोर अंधकार को आशा में परिवर्तित कर सकता है। उन्होंने कहा कि हजारों दीप जलाने के बावजूद यदि मन में अहंकार बना रहे तो प्रकाश पर्व का वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है। आदर्श दीपावली तभी सार्थक होगी, जब हमारा अंतर्मन प्रकाशित होगा और उस प्रकाश की आभा से दूसरों का जीवन भी आनंदमय बनेगा।

42 जिलों और 10 राज्यों तक पहुंचा सुंदरकांड महा अभियान

सपना गोयल के नेतृत्व में परमपिता परमात्मा की असीम अनुकम्पा से उत्तर प्रदेश सहित राष्ट्रीय स्तर पर ‘सुंदरकांड महा अभियान, भारत वर्ष की बने पहचान’ का व्यापक संचालन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य सुंदरकांड के आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही भारतीय सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना को व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठित करना है। वर्तमान में यह अभियान उत्तर प्रदेश के 42 जिलों और देश के 10 राज्यों तक अपनी पहुंच बना चुका है। सपना गोयल का एकमात्र संकल्प है कि संतों और ऋषियों की पावन भूमि भारत एक बार पुनः विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित हो तथा भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं का प्रकाश संपूर्ण विश्व में प्रसारित हो।

देश के प्रमुख तीर्थस्थलों पर हो चुके हैं भव्य सुंदरकांड पाठ

इस महा अभियान के अंतर्गत देश के अनेक प्रसिद्ध धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों पर भव्य सुंदरकांड पाठ का सफल आयोजन किया जा चुका है। इनमें उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित प्राचीन सिद्धबली मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हरिद्वार की हर की पौड़ी, रुड़की का महादेव मंदिर, चित्रकूट के पावन तीर्थ परिसर रामघाट, प्रयागराज स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर, अयोध्या के प्रभु श्रीराम मंदिर, मथुरा के भगवान श्रीकृष्ण मंदिर तथा कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगाजी घाट परिसर जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं। इन आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को सुंदरकांड के आध्यात्मिक महत्व से जोड़ने और धार्मिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास निरंतर किया जा रहा है।

18 नवम्बर से त्रिदिवसीय ऋषिकेश तीर्थयात्रा, लखनऊ में 11 हजार महिलाओं का सुंदरकांड पाठ प्रस्तावित

सुंदरकांड महा अभियान को और अधिक व्यापक स्वरूप देने की दिशा में आगामी कार्यक्रमों की भी रूपरेखा तैयार की गई है। इसी क्रम में आगामी 18 नवम्बर से त्रिदिवसीय ऋषिकेश तीर्थयात्रा का शुभारंभ होगा। वहीं, लखनऊ में सपना गोयल की अगुआई में 11 हजार महिलाओं के सामूहिक सहभाग से विशाल सुंदरकांड पाठ आयोजित करने की योजना भी प्रस्तावित है। इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ना, सामूहिक भक्ति की भावना को मजबूत करना और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

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