April 19, 2026

भारत से दूरी, चीन-पाकिस्तान से नजदीकी: मोहम्मद यूनुस के एक साल में बांग्लादेश की विदेश नीति में बड़ा बदलाव

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को सत्ता संभाले एक साल पूरा हो गया है और इस अवधि में देश की विदेश नीति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में भारत के साथ रिश्तों में खटास आई है, जबकि चीन और पाकिस्तान के साथ नजदीकी बढ़ी है। जापान और यूरोपीय संघ के साथ भी संबंधों को मजबूती देने की कोशिश की गई है, लेकिन भारत से बिगड़ते रिश्ते अब भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

 

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश के रिश्ते बेहद करीबी माने जाते थे। भारत न केवल सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था, बल्कि चीन और पाकिस्तान से भी सीमित संबंध बनाए रखे जाते थे। लेकिन यूनुस सरकार ने इस रुख में बदलाव करते हुए कई भारत-विरोधी नीतियां अपनाईं और बीजिंग व इस्लामाबाद के साथ गहरे कूटनीतिक संवाद शुरू किए। इसका असर यह हुआ कि चिकित्सा और शैक्षिक उद्देश्यों से भारत आने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या में भारी गिरावट आई और लोग अब बैंकॉक, सिंगापुर जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

 

चीन ने इस मौके का लाभ उठाते हुए यूनुस को बीजिंग आमंत्रित किया और राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। हालांकि, बड़े निवेश की बातें हुईं, लेकिन अभी तक यह योजनाएं केवल कागज पर ही हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने धार्मिक और ऐतिहासिक समानताओं को आधार बनाकर सैन्य और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की पहल की है। दोनों देशों के बीच कई प्रतिनिधिमंडल यात्राएं भी हुई हैं।

 

जापान के साथ यूनुस का टोक्यो दौरा और प्रधानमंत्री से मुलाकात भी चर्चा में रही। जापान ने हसीना सरकार के दौरान किए गए वादों को जारी रखने में रुचि दिखाई, हालांकि नए बड़े समझौते पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। वहीं, यूरोपीय संघ के साथ साझेदारी और सहयोग समझौते (PCA) पर बातचीत जारी है, जो भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेगा।

 

अमेरिका के साथ संबंधों में भी बदलाव आया है। शेख हसीना के तख्तापलट में अमेरिका की भूमिका को लेकर अटकलें रही हैं। यूनुस ने तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की थी, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद रिश्तों में ठंडक आ गई। अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बावजूद वार्ता का सिलसिला जारी है। हालांकि, भारत को दरकिनार कर विकास की राह बनाना यूनुस सरकार के लिए अब भी मुश्किल चुनौती है, जिस पर फरवरी 2026 में होने वाले चुनावों के बाद और भी नजरें टिकी रहेंगी।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!