April 21, 2026

झूठी जीत या गूगल से उठाई गई फोटो? पाकिस्तानी सेना और पीएम शहबाज फिर बने मजाक का कारण

इस्लामाबाद की एक हाई-प्रोफाइल डिनर पार्टी में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने एक भव्य फ्रेम वाली पेंटिंग उपहार में दी, तो वहां मौजूद लोगों की नजरें उस खास तस्वीर पर टिक गईं। देखने में यह एक जबरदस्त सैन्य कार्रवाई की झलक देती हुई तस्वीर थी—जैसे पाकिस्तान ने हाल ही में भारत पर कोई बड़ा हमला कर दिया हो। लेकिन कुछ ही घंटों बाद सोशल मीडिया पर तेज नजर रखने वाले लोगों ने इसका ऐसा भांडा फोड़ा कि पाकिस्तान की एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी हो गई।

 

दरअसल, जो पेंटिंग शहबाज शरीफ को भेंट की गई थी, वो असल में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा किए गए एक सैन्य अभ्यास की चार साल पुरानी तस्वीर से हूबहू मिलती थी। जानकारों और इंटरनेट यूज़र्स ने तुरंत इसे पहचान लिया और सोशल मीडिया पर पोस्ट करना शुरू कर दिया कि यह पेंटिंग गूगल से ली गई चीनी सैन्य तस्वीर का मॉर्फ्ड वर्जन है।

 

एक यूजर ने कटाक्ष करते हुए लिखा, “ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने भारत के खिलाफ अपनी ‘काल्पनिक’ जीत दिखाने के लिए प्रधानमंत्री को चीन की पुरानी मिलिट्री एक्सरसाइज़ की तस्वीर भेंट कर दी है। नकली जीत की कहानी के साथ नकली तस्वीर—यह मज़ाक नहीं तो और क्या है?”

 

इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर एक के बाद एक मीम्स और तंज़ की बाढ़ आ गई। एक अन्य यूजर ने लिखा, “ये पाकिस्तान के लिए एक और शर्मनाक पल है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को गूगल से डाउनलोड की गई चीनी PHL-03 रॉकेट लॉन्चर की फोटो उपहार में मिली है।”

 

इस पूरी घटना ने एक और बार दिखा दिया कि कैसे पाकिस्तान झूठे प्रचार के सहारे अपनी हार को जीत में बदलने की कोशिश कर रहा है।

 

भारत द्वारा हाल ही में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान चारों ओर से घिरा हुआ है। भारतीय सैन्य अभियान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहना मिल रही है, जबकि पाकिस्तान बार-बार झूठे दावों और ‘ऑपरेशन बनयान-उन-मर्सूस’ जैसी कथित जीत की कहानी गढ़ने में लगा है।

 

पेंटिंग के पीछे छिपा यह फर्जीवाड़ा तब और भी शर्मनाक हो गया जब यह सामने आया कि यह चित्र सार्वजनिक रूप से इंटरनेट पर मौजूद चीनी सैन्य अभ्यास की एक फोटो से मिलती-जुलती है।

 

असीम मुनीर के सेना प्रमुख बनने के बाद से ही उनके कामकाज और पदोन्नति को लेकर पाकिस्तान में सवाल उठते रहे हैं। फील्ड मार्शल का ओहदा पारंपरिक रूप से उन्हीं सैन्य अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने देश को युद्ध में निर्णायक जीत दिलाई हो। लेकिन पाकिस्तान में यह पद ऐसे समय में दिया गया है जब देश खुद ही अपने कथित ‘हमलों’ की फेक तस्वीरें गढ़ने में जुटा है।

 

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना पाकिस्तान की उस गहराई तक गई हताशा को दर्शाती है, जहाँ वह हार को छुपाने के लिए न केवल झूठे ऑपरेशनों का प्रचार करता है, बल्कि अपने प्रधानमंत्री तक को गूगल से ली गई तस्वीरें भेंट करता है।

 

इस पूरे फर्जीवाड़े ने पाकिस्तान को न केवल वैश्विक स्तर पर हास्यास्पद बना दिया है, बल्कि खुद उसके नागरिक भी अब अपनी सरकार और सेना के इस बचकाने प्रचार अभियान की आलोचना करने लगे हैं।

 

नतीजा ये है कि जीत का दावा करते हुए पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी किरकिरी करा बैठा है—इस बार एक पेंटिंग के ज़रिए।

 

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