Naravane Book Controversy: किताब विवाद पर राहुल गांधी का बयान, बोले—नरवणे ने खुद शेयर किया था लिंक, मुझे उन पर भरोसा
पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (सेवानिवृत्त) की किताब को लेकर उठा विवाद अब सियासी और कानूनी मोड़ ले चुका है। इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का बयान सामने आया है, जिसने बहस को और तेज कर दिया है। राहुल गांधी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जिस किताब को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसका लिंक खुद जनरल नरवणे ने करीब तीन साल पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया था। ऐसे में उन्हें पूर्व आर्मी चीफ की बात पर भरोसा है और वे नहीं मानते कि जनरल नरवणे झूठ बोल सकते हैं।
राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट 2023 की बताई जा रही है, जिसमें जनरल नरवणे ने अपनी किताब का लिंक शेयर करते हुए लोगों से उसे खरीदने की अपील की थी। राहुल ने कहा कि इस पूरे विवाद में या तो पूर्व आर्मी चीफ सच बोल रहे हैं या फिर प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस की ओर से दी जा रही जानकारी गलत है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें पेंगुइन से ज्यादा जनरल नरवणे पर भरोसा है, क्योंकि एक पूर्व सेना प्रमुख से झूठ की उम्मीद नहीं की जा सकती।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने जनरल नरवणे की कथित अप्रकाशित किताब के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसी सूचनाएं सामने आई हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ नामक किताब की एक प्रति सक्षम प्राधिकारियों की अनिवार्य मंजूरी के बिना सर्कुलेशन में है। इसी आधार पर मामले की जांच शुरू की गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किताब की सामग्री कैसे और किसके द्वारा सार्वजनिक की गई।
विवाद के केंद्र में प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का बयान भी है। पेंगुइन ने साफ किया है कि जनरल नरवणे की आत्मकथा के प्रकाशन अधिकार केवल उसी के पास हैं और अब तक किताब प्रकाशित नहीं हुई है। प्रकाशक का दावा है कि पुस्तक की किसी भी रूप में कोई आधिकारिक प्रति जारी नहीं की गई है और जो भी संस्करण फिलहाल सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, वह कॉपीराइट उल्लंघन की श्रेणी में आता है। पेंगुइन ने यह भी चेतावनी दी है कि ऐसे अनधिकृत संस्करणों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को राजनीतिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि किताब में ऐसी बातें हो सकती हैं, जो भारत सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असहज करने वाली हों। उन्होंने कहा कि शायद इसी वजह से यह विवाद खड़ा किया गया है। राहुल ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किताब सच में प्रकाशित नहीं हुई है, तो फिर वह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कैसे उपलब्ध बताई जा रही है। फिलहाल यह मामला कानून, राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी बहस का रूप ले चुका है। अब सभी की निगाहें जांच के नतीजों और इस विवाद के अगले मोड़ पर टिकी हुई हैं।
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