April 20, 2026

क्या खत्म होगा मुस्लिम आरक्षण? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दिया बड़ा बयान!

नई दिल्ली: देश में मुस्लिम आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत के संविधान में धार्मिक आधार पर आरक्षण की कोई अनुमति नहीं है। उनके इस बयान के बाद मुस्लिम आरक्षण पर एक नई बहस छिड़ गई है।

 

रिजिजू ने कहा कि मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा आज का नहीं है, बल्कि 1947 में भी मुस्लिम लीग द्वारा इसे उठाया गया था, लेकिन उस समय इसे सिरे से खारिज कर दिया गया था। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) राष्ट्र है, जहां आरक्षण केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर ही दिया जा सकता है, न कि धर्म के आधार पर।

 

मुस्लिम आरक्षण की संवैधानिक स्थिति पर उठे सवाल

केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में कहा, “संविधान के अनुसार, आरक्षण का आधार केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन हो सकता है। धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस विषय पर संविधान के मूल सिद्धांतों के तहत ही निर्णय लेगी।

 

राजनीतिक गलियारों में हलचल

रिजिजू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में मुस्लिम आरक्षण को लेकर राजनीतिक गहमा-गहमी बढ़ गई है। कुछ राजनीतिक दल मुस्लिम समुदाय को आरक्षण देने की वकालत कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार का रुख स्पष्ट है कि धर्म के आधार पर किसी भी तरह का आरक्षण असंवैधानिक है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट भी अपने कई फैसलों में यह कह चुका है कि आरक्षण का आधार केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ापन ही हो सकता है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में मुस्लिम समुदाय को पिछड़े वर्गों में शामिल कर कुछ हिस्सों में आरक्षण दिया गया है, लेकिन इन फैसलों को लेकर कानूनी चुनौतियां भी पेश आई हैं।

 

मुस्लिम आरक्षण पर भविष्य की राह

केंद्र सरकार का रुख साफ है कि संविधान में जो प्रावधान हैं, उसी के तहत आरक्षण नीति को आगे बढ़ाया जाएगा। रिजिजू के इस बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या मुस्लिम आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाएगा या इसे समाप्त किया जा सकता है।

 

देश में आगामी चुनावों के मद्देनजर यह मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा विषय बन सकता है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाती है और सुप्रीम कोर्ट में इस पर क्या रुख अपनाया जाता है।

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