April 20, 2026

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की संविधान पर टिप्पणी से संसद में हंगामा!

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार द्वारा संविधान पर की गई कथित टिप्पणी को लेकर संसद के दोनों सदनों में हंगामा मच गया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान को कोई नहीं बदल सकता, और कोई भी आरक्षण को समाप्त नहीं कर सकता। इस संविधान की रक्षा के लिए ही हमने कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत जोड़ो यात्रा की। जबकि दूसरी ओर, वे (एनडीए सांसदों की ओर इशारा करते हुए) भारत को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।”

 

इस बयान के तुरंत बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी मुस्लिम आरक्षण को लेकर बाबा साहब के बनाए संविधान को बदलना चाहती है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से सवाल किया, “अगर हिम्मत है, तो कर्नाटक के मुस्लिम आरक्षण पर स्पष्टीकरण दें।” रिजिजू ने इस पर भी टिप्पणी की कि कर्नाटक के मुस्लिम आरक्षण मुद्दे को लेकर संसद में विपक्ष का रवैया आलोचना के योग्य है।

 

लोकसभा में भी हंगामा, कार्यवाही स्थगित 

संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने के बाद लोकसभा में भी हंगामा हुआ। जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, ट्रेजरी बेंच के सदस्यों ने कर्नाटक के मुस्लिम आरक्षण पर विपक्ष पर हमला किया, जिसके बाद हंगामा बढ़ गया। इसके कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे तक स्थगित कर दी गई, और फिर जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो हंगामा जारी रहने के कारण कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

 

कर्नाटक के मुस्लिम आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस जारी रही, और विपक्ष ने उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस्तीफे की मांग की। हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित होने से संसद के दोनों सदनों में तनावपूर्ण माहौल बन गया।

कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण को लेकर विवाद नया नहीं है, और यह मुद्दा राज्य की राजनीति में गहरे मतभेदों को जन्म दे रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह आरक्षण अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करता है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे संविधान के खिलाफ बताते हुए बदलाव की मांग कर रहा है।

 

कर्नाटक के मुस्लिम आरक्षण को लेकर बढ़ते विवाद के साथ, अब यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है, और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री की विवादित टिप्पणी ने इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है। इस बीच, कर्नाटक सरकार और केंद्र सरकार दोनों पर इस मुद्दे को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है।

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