फिल्म इंडस्ट्री के दो दिग्गज नाम—बीआर चोपड़ा और अमिताभ बच्चन। दोनों ने सिनेमा को नई ऊंचाइयां दीं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि जब अमिताभ बच्चन अपने संघर्ष के दिनों में थे, तब बीआर चोपड़ा ने उन्हें स्क्रीन टेस्ट में रिजेक्ट कर दिया था। यह किस्सा 1967 का है, जब टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रिकाओं फिल्मफेयर और माधुरी के बैनर तले एक टैलेंट कॉन्टेस्ट आयोजित हुआ था। अमिताभ ने अपने भाई अजिताभ की मदद से आवेदन किया, लेकिन पहले ही राउंड में उनकी तस्वीरें खारिज कर दी गईं। उस समय निर्णायक बीआर चोपड़ा थे, जिन्होंने किसी सिफारिश के बावजूद अमिताभ को मौका नहीं दिया।
बीआर चोपड़ा अपने अनुशासन और सख्त फैसलों के लिए जाने जाते थे। सुनील दत्त और नरगिस ने भी अमिताभ के पक्ष में सिफारिश की, लेकिन चोपड़ा अपनी राय से नहीं डिगे। कहा जाता है कि उन्हें अमिताभ की लंबाई और व्यक्तित्व एक पारंपरिक हीरो के अनुरूप नहीं लगे। यही कारण था कि बिग बी को उस वक्त कई प्रोडक्शन हाउस से निराशा हाथ लगी। हालांकि, किस्मत ने पलटी मारी, और कुछ वर्षों बाद वही अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा के ‘शहंशाह’ बन गए।
बाद के वर्षों में बीआर फिल्म्स के बैनर तले अमिताभ को फिल्मों में काम करने का मौका मिला। 1975 में आई ज़मीर में उन्होंने पहली बार इस बैनर के साथ काम किया। फिर 2003 में बागवां और 2008 में भूतनाथ जैसी फिल्मों ने उनके और बीआर चोपड़ा परिवार के रिश्ते को एक नई ऊंचाई दी। बागवां, जिसकी कहानी खुद बीआर चोपड़ा ने लिखी थी, ने भारतीय पारिवारिक मूल्यों को नए सिरे से दर्शाया। भूतनाथ ने बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी दर्शकों के दिल में जगह बनाई।
बीआर चोपड़ा ने अपने करियर में नया दौर, वक्त, गुमराह, पति पत्नी और वो, इंसाफ का तराजू और निकाह जैसी सामाजिक संदेश देने वाली क्लासिक फिल्में बनाईं। उन्होंने टीवी पर महाभारत सीरियल बनाकर भी इतिहास रचा। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण और फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड जैसे कई सम्मान मिले। 5 नवंबर 2008 को उनके निधन के बाद अमिताभ बच्चन ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा था, “बीआर चोपड़ा वे निर्देशक थे जो हर फिल्म को एक मिशन की तरह बनाते थे।”
संघर्ष के दौर में रिजेक्ट करने वाले वही बीआर चोपड़ा बाद में अमिताभ के लिए प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक बन गए — और यही सिनेमा की असली कहानी है।
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