“एक्ट्रेस की डिमांड बनी बहस का मुद्दा… स्टार्स बंटे दो खेमों में, सैफ अली खान ने तोड़ी चुप्पी!”
जबसे खबर आई कि दीपिका पादुकोण ने फिल्म स्पिरिट छोड़ दी है, तबसे फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग ही बहस छिड़ गई है। चर्चाओं के केंद्र में है उनकी वह डिमांड, जिसमें उन्होंने फिल्म के सेट पर रोज़ाना केवल 8 घंटे काम करने की शर्त रखी थी। भले ही अब दीपिका इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन उनकी यह मांग अब कई दिग्गज कलाकारों को सोचने पर मजबूर कर रही है। सवाल है—क्या पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में संतुलन बनाना एक स्टार की ‘डिमांड’ होनी चाहिए या फिर ‘ज़रूरत’?
इसी बहस के बीच सैफ अली खान का एक बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे मामले को और भी दिलचस्प बना दिया है। सैफ ने एक इंटरव्यू में कहा कि उनके लिए काम से ज्यादा जरूरी है फैमिली टाइम। उन्होंने बताया कि वे ऐसे वर्क शेड्यूल को ‘सक्सेस’ नहीं मानते, जो इंसान को घर पहुंचने तक का वक्त भी न दे। उनके मुताबिक, असली सक्सेस वही है जब आप यह कह सकें कि “अब मुझे घर जाना है और अपने बच्चों के साथ वक़्त बिताना है।”
अरब मीडिया समिट में बोलते हुए सैफ ने कहा कि उन्हें ये बात बिल्कुल पसंद नहीं कि जब वो घर लौटें, तो उनके बच्चे सो चुके हों। इसलिए उन्होंने तय किया है कि जब भी उनके बच्चे छुट्टियों पर होंगे, वे काम नहीं करेंगे। यही नहीं, उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक उम्र के बाद, जब मां और बच्चे दोनों की ज़रूरतें बढ़ जाती हैं, तब संतुलन और ज़िम्मेदारी दोनों अहम हो जाते हैं।
अब सवाल यह भी उठता है कि क्या दीपिका की यह 8 घंटे के शेड्यूल वाली डिमांड वाकई में किसी स्टारडम का हिस्सा थी या फिर मां बनने के बाद अपनी जिंदगी को एक नई प्राथमिकता देने की एक पहल?
जहां कुछ लोगों ने दीपिका की इस मांग को पूरी तरह जायज़ बताया है, वहीं कुछ स्टार्स इसे इंडस्ट्री के “डिसिप्लिन” के ख़िलाफ़ मान रहे हैं। लेकिन सैफ अली खान जैसे सीनियर एक्टर की राय यह साफ दर्शाती है कि इंडस्ट्री में अब सोच बदल रही है।
आख़िरकार, क्या फैमिली टाइम मांगना ‘सख्त शेड्यूल’ से टकराव है या फिर एक नई सोच की शुरुआत? दीपिका की यह डिमांड सिर्फ एक फिल्म से बाहर निकलने की वजह नहीं, बल्कि आने वाले समय में बॉलीवुड की काम करने की शैली को दोबारा परिभाषित करने वाली एक बड़ी बहस का हिस्सा बन चुकी है।
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