April 17, 2026

महबूबा मुफ्ती ने इल्तिजा मुफ्ती के PSOs के निलंबन को लेकर उठाए सवाल, सत्तारूढ़ सरकार पर भी साधा निशाना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने एक पोस्ट के जरिए राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती के दो व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSOs) को बिना किसी गलती के निलंबित कर दिया गया। उनका कहना था कि यह कदम सिर्फ इसलिए उठाया गया क्योंकि इल्तिजा ने अपने घर में कथित रूप से “कैद” होने के बावजूद कठुआ पहुंचने में सफलता पाई। महबूबा ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान इल्तिजा ने सोपोर में वसीम मीर और कठुआ में माखन दीन की मौतों के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की कमी पर भी सवाल उठाए थे।

महबूबा मुफ्ती ने लिखा, “यह विडंबनापूर्ण और अनुचित है कि इल्तिजा के दो PSOs को बिना किसी गलती के निलंबित कर दिया गया। उन्हें सिर्फ इसलिए सजा दी गई क्योंकि इल्तिजा अपराधी की तरह घर में कैद होने के बावजूद कठुआ पहुंचने में सफल हो गई।”

इस दौरान महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कांफ्रेंस सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सोपोर में वसीम मीर और बिलावर में माखन दीन की मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा, “सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) सरकार, जो लोगों की सुरक्षा और सम्मान का वादा कर सत्ता में आई थी, अब खामोश दर्शक बन चुकी है। वे न केवल अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं, बल्कि अन्यायपूर्ण और असामान्य प्रयासों को सामान्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

महबूबा और उनकी बेटी इल्तिजा ने 8 फरवरी को श्रीनगर से वसीम मीर और माखन दीन के घर जाने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें श्रीनगर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, 9 फरवरी को महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती सोपोर और कठुआ पहुंचने में सफल रही। वहां दोनों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, लेकिन इल्तिजा ने आरोप लगाया कि जब वह जम्मू में एक संवाददाता सम्मेलन करने की कोशिश कर रही थीं, तो उन्हें फिर से रोका गया।

इल्तिजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए प्रशासन की निंदा की और कहा कि इस तरह के कदम उनकी आवाज को दबाने के लिए उठाए जा रहे हैं।

यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया मोड़ लाने की संभावना रखता है, जहां सत्तारूढ़ दल की नीति और सुरक्षा की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस विवाद के बाद सरकार पर कोई कार्रवाई की जाएगी और क्या इल्तिजा के साथ निलंबित किए गए PSOs को बहाल किया जाएगा।

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